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ईरान से टकराव के पहले अमेरिका ने खाड़ी में बढ़ाई ताकत, सऊदी-कतर में तैनात की 2 पैट्रियट मिसाइल बैटरी

Axios की रिपोर्ट - तेल-गैस ठिकानों पर ईरान के जवाबी हमले के डर से सऊदी और कतर ने जताई थी चिंता।तैनाती का मकसद दोनों देशों के अहम तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षा देना है।
ईरान से टकराव के पहले अमेरिका ने खाड़ी में बढ़ाई ताकत, सऊदी-कतर में तैनात की 2 पैट्रियट मिसाइल बैटरी
सऊदी-कतर में तैनात की 2 पैट्रियट मिसाइल बैटरी

वॉशिंगटन। अमेरिका ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य ऑपरेशन की तैयारी में जुटा है। इसी के तहत अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करते हुए सऊदी अरब और कतर में दो अतिरिक्त पैट्रियट मिसाइल बैटरी तैनात की हैं। इसका मकसद दोनों देशों के अहम तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षा देना है। Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, दो अमेरिकी अधिकारियों और एक क्षेत्रीय सूत्र ने इस तैनाती की पुष्टि की है। यह कदम तब उठाया गया जब सऊदी और कतरी नेतृत्व ने आशंका जताई थी कि अगर अमेरिका एक बार फिर तेहरान पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू करता है, तो ईरान उनके एनर्जी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है।

कतर और सऊदी में लगाई बैटरी

रिपोर्ट में बताया गया है कि एक पैट्रियट बैटरी सऊदी अरब में एक महत्वपूर्ण तेल सुविधा की सुरक्षा के लिए लगाई गई है, जबकि दूसरी बैटरी कतर में प्राकृतिक गैस से जुड़ी सुविधा की हिफाजत के लिए तैनात की गई है। यह कदम साफ संकेत देता है कि अमेरिका-ईरान के बीच टकराव बढ़ने पर खाड़ी के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा खतरा मंडरा सकता है। Axios के अनुसार, अगस्त की शुरुआत में जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले सहित बड़े सैन्य एक्शन पर विचार कर रहे थे, तब सऊदी अरब और कतर के नेताओं ने इस योजना पर आपत्ति जताई थी। दोनों देशों को डर था कि ऐसे में ईरान उनकी तेल और नेचुरल गैस सुविधाओं को निशाना बना सकता है।

सीधा असर होगा तैल-गैस सप्लाई पर

इस क्षेत्र में तेल या गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर किसी भी बड़े हमले का सीधा असर एनर्जी सप्लाई पर पड़ेगा और ग्लोबल मार्केट में दबाव और बढ़ सकता है, खासकर तब जब इस टकराव की वजह से अहम समुद्री रास्तों से होने वाली शिपिंग प्रभावित हो। पैट्रियट सिस्टम की यह अतिरिक्त तैनाती ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका पर अपने मिसाइल डिफेंस स्टॉक को लेकर पहले से ही दबाव है। ईरान के साथ तनाव शुरू होने के बाद से पैट्रियट बैटरी और खासतौर पर उसके इंटरसेप्टर्स की मांग तेजी से बढ़ी है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के विश्लेषण के अनुसार, ईरान के साथ टकराव के दौरान बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के बाद अमेरिका के पास पैट्रियट इंटरसेप्टर का स्टॉक घटकर 1,000 से भी कम रह गया था।

पेंटागन बढ़ा रहा पश्चिम एशिया में तैनाती

इस बीच, पेंटागन पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है और क्षेत्र में अतिरिक्त युद्धपोत, लड़ाकू विमान और सैनिकों की तैनाती कर रहा है। हजारों अमेरिकी मरीन सैनिकों को ले जा रहे मेकिन आइलैंड एम्फीबियस रेडी ग्रुप को भी इसी इलाके में तैनात किया गया है, जिससे मध्य पूर्व में वाशिंगटन की सैन्य ताकत और मजबूत हो गई है।

पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम क्या है

पैट्रियट एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम जमीन पर तैनात किया जाने वाला एक एडवांस सिस्टम है, जिसे अमेरिका और उसके सहयोगी देश अपने सैनिकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को हवाई खतरों से बचाने के लिए इस्तेमाल करते हैं।अमेरिकी सेना के मुताबिक, पैट्रियट सिस्टम लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाव करने में सक्षम है। इसके फायर यूनिट में रडार, एंगेजमेंट कंट्रोल स्टेशन और लॉन्चर शामिल होते हैं।सबसे आधुनिक PAC-3 MSE (Missile Segment Enhancement) इंटरसेप्टर में 'हिट-टू-किल' तकनीक का इस्तेमाल होता है, जो दुश्मन की मिसाइल से सीधे टकराकर उसे नष्ट कर देता है। यह टू-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर से संचालित होता है, जिससे इसे पुराने PAC-3 वर्जन के मुकाबले ज्यादा रेंज, अधिक ऊंचाई और बेहतर मैन्युवर क्षमता मिलती है।एक पैट्रियट फायर यूनिट में आमतौर पर एक मल्टी-फंक्शन रडार, कंट्रोल स्टेशन और कई लॉन्चर होते हैं। कॉन्फ़िगरेशन के आधार पर, एक लॉन्चर में 12 तक PAC-3 MSE इंटरसेप्टर तैनात किए जा सकते हैं।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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