
पुणे। उम्र केवल एक संख्या है और 79 वर्षीय उषा रे ने इसे साबित कर दिखाया है। डॉ. डी वाय पाटिल विद्यापीठ सेंटर फॉर ऑनलाइन लर्निंग, पुणे से हॉस्पिटल एंड हेल्थकेयर मैनेजमेंट में एमबीए कर रही उषा रे दुनिया की सबसे उम्रदराज एमबीए ग्रेजुएट बनने की राह पर हैं। मौजूदा समय में यह रिकॉर्ड 76 वर्षीय डॉ. पीटर फंग के नाम है, जिन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले से एमबीए पूरा किया था।
नौकरी के साथ पढ़ाई का संतुलन
लखनऊ की रहने वाली उषा रे लवी शुभ अस्पताल में अकाउंट्स और एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में कार्यरत हैं। अपनी नियमित नौकरी के साथ-साथ वह एमबीए की ऑनलाइन क्लासेज भी पूरी ईमानदारी से अटेंड करती हैं। उनका कहना है कि खाली दिमाग शैतान का घर होता है। शाम को काम के बाद मेरे पास समय होता था, लेकिन मैं उसे बेकार जाने नहीं देना चाहती थी। मुझे लगा कि मुझे अपने लिए कुछ करना चाहिए।
हीन भावना से आत्मविश्वास तक का सफर
उषा रे ने बताया कि एमबीए न करने की वजह से उन्हें काम के दौरान हीन भावना महसूस होती थी। उन्होंने कहा, मुझे ऐसा लगता था कि एमबीए डिग्री धारकों की तुलना में मैं कमतर हूं। लेकिन फिर मैंने सोचा कि मुझे इससे क्या रोक रहा है और जब मैंने यह ठान लिया कि मैं एमबीए करूंगी, तो अब मुझे कोई नहीं रोक सकता।
तकनीक के साथ भी कर रहीं कदमताल
उनकी सफलता में डॉ. डी वाय पाटिल विद्यापीठ सेंटर फॉर ऑनलाइन लर्निंग के ऑनलाइन एमबीए कोर्स ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि शुरुआत में लैपटॉप इस्तेमाल करना उनके लिए मुश्किल था, लेकिन उन्होंने खुद को पीछे नहीं रखा।
उन्होंने कहा कि मैंने बिना कई डर महसूस किए, लैपटॉप खरीदा और अभ्यास करना शुरू कर दिया। अभी भी सीख रही हूं, लेकिन मैंने इसे कभी भी अपनी पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया। विश्वविद्यालय और वहां के स्टाफ ने मुझे पूरा सहयोग दिया। प्लेटफॉर्म इतना यूजर फ्रेंडली है कि अब मैं इसे आराम से चला सकती हूं।
2010 में अपने पति के निधन के बाद से वह अकेले रह रही हैं, क्योंकि उनका बेटा लखनऊ से बाहर रहता है। लेकिन उषा रे ने अपने आत्मनिर्भर जीवन को ही अपनी ताकत बना लिया है।
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