मैं 50 साल तक रहूं या न रहूं... पिता माधवराव को याद कर इतना इमोशनल क्यों हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया

ग्वालियर। केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने ग्वालियर दौरे के दौरान एक कार्यक्रम में भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि ‘अगले 50 साल तक, मैं रहूं या न रहूं, विकास की कोई दिक्कत नहीं होगी। जितना आधुनिक दिल्ली का स्टेशन है उतना ही आधुनिक ग्वालियर का रेलवे स्टेशन होगा। आने वाले 50 साल तक मूल विकास से जुड़ी दिक्कत नहीं होगी।’
मैं मुख्यमंत्री मोहन यादव को बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं। नारायण सिंह और स्वास्थ्य मंत्री को भी धन्यवाद कि आज इस मुरार अस्पताल में मेरे पिताजी की प्रतिमा का अनावरण हुआ है। हमें उनके बताए रास्ते पर चलकर उनके लक्ष्य को पूरा करना है। उन्होंने कहा कि, मेरे पूज्य पिताजी ने दल से ऊपर उठकर जन सेवा के दर्शन शास्त्र के आधार पर लोगों और क्षेत्र की सेवा का काम किया।
पिता की प्रतिमा का किया अनावरण
ज्योतिरादित्य सिंधिया तीन दिवसीय दौरे पर ग्वालियर पहुंचे। जहां उन्होंने 5 अक्टूबर को मुरार जिला चिकित्सालय में अपने पिता स्वर्गीय माधवराव सिंधिया की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने स्व. सिंधिया की स्मृति में शमी का पौधा रोपा। प्रतिमा का अनावरण करने के बाद केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज बहुत ही भावुक दिन है।
मैं मुख्यमंत्री मोहन यादव को बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं। नारायण सिंह और स्वास्थ्य मंत्री को भी धन्यवाद कि आज इस मुरार अस्पताल में मेरे पिताजी की प्रतिमा का अनावरण हुआ है। हमें उनके बताए रास्ते पर चलकर उनके लक्ष्य को पूरा करना है। उन्होंने कहा कि, मेरे पूज्य पिताजी ने दल से ऊपर उठकर जन सेवा के दर्शन शास्त्र के आधार पर लोगों और क्षेत्र की सेवा का काम किया।
लोगों को बताया क्या होना चाहिए जीवन का उद्देश्य
सिंधिया ने कहा कि, उनके पिता का मानना था कि जीवन में चाहे आप कोई भी रास्ता चुनें, चाहे वह बिजनेस हो, राजनीति हो या कोई अन्य काम। हमारे जीवन का उद्देश्य यह होना चाहिए कि हम कई लोगों के जीवन में खुशियां ला सकें। सिंधिया ने कहा कि, मेरे पिता मात्र 26 साल की उम्र में सांसद बने और उन्होंने अपना जीवन सेवा के मिशन के साथ जीया। विपरीत परिस्थितियों में भी वह लोगों की सेवा करने से पीछे नहीं हटे।




















