यूक्रेन ने ड्रोन को बनाया 'उड़ती एम्बुलेंस', फ्रंटलाइन से घायल सैनिक को किया एयरलिफ्ट

कीव। यूक्रेन ने भारी वजन उठाने वाले ड्रोन को 'उड़ती एम्बुलेंस' में बदल दिया है। इस ड्रोन के जरिए फ्रंटलाइन के एक खतरनाक इलाके से घायल सैनिक को बाहर निकाला गया, जहां बारूदी सुरंगों और रूसी ड्रोनों की मौजूदगी के कारण जमीन के रास्ते रेस्क्यू करना बेहद जोखिम भरा था। यूक्रेन की आधिकारिक मिलिट्री न्यूज एजेंसी 'आर्मीइन्फॉर्म' के मुताबिक, रूसी ड्रोनों की सक्रियता और बारूदी सुरंगों के कारण ग्राउंड रेस्क्यू ऑपरेशन असंभव हो गया था। ऐसे में यूक्रेनी सेना ने एक हेवी-लिफ्ट हेक्साकॉप्टर (छह रोटर वाला ड्रोन) का इस्तेमाल कर फ्रंटलाइन से घायल सैनिक को सुरक्षित निकाला।
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अपनी तरह का पहला रेस्क्यू मिशन
यूक्रेनी कंपनी 'गुर्ज़ुफ डिफेंस' द्वारा बनाए गए इस ड्रोन से किए गए ऑपरेशन को कीव दुनिया का अपनी तरह का पहला रेस्क्यू मिशन बता रहा है। यह दिखाता है कि कैसे एरियल ड्रोन भीषण युद्ध क्षेत्र से सैनिकों को बचाने का नया और असरदार तरीका बन सकते हैं। 'द वॉर ज़ोन' (TWZ) के अनुसार, इस ऑपरेशन में यूक्रेन की 92वीं, 30वीं और 14वीं मैकेनाइज्ड ब्रिगेड, 10वीं आर्मी कोर और गुर्ज़ुफ डिफेंस के कर्मियों ने हिस्सा लिया। घायल सैनिक 30वीं मैकेनाइज्ड ब्रिगेड का था, जबकि उसी ब्रिगेड के एक UAV ऑपरेटर ने इस हेक्साकॉप्टर को उड़ाया। रेस्क्यू के दौरान सैनिक लगातार ऑपरेटर के संपर्क में रहा। TWZ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह ड्रोन यूक्रेनी निर्माता गुर्ज़ुफ डिफेंस ने मुफ्त में उपलब्ध कराया था।
रेस्क्यू के पहले ड्रोन में किए गए बदलाव
सैन्य विशेषज्ञों ने कंपनी के साथ मिलकर ड्रोन को मिशन के अनुकूल बनाया, ताकि उड़ान के दौरान विमान स्थिर रहे और अत्यधिक हिलने-डुलने या पलटने से बचा जा सके। फुटेज में दिख रहा है कि सैनिक को हेक्साकॉप्टर के नीचे हार्नेस से सुरक्षित किया गया और फिर हवा में उठाया गया। पारंपरिक मेडिकल इवैक्यूएशन हेलीकॉप्टर के उलट, ड्रोन ने उसे अपने ढांचे के नीचे लटकाकर ले जाया, बिना किसी बंद केबिन या सुरक्षित मेडिकल चैंबर के। सेना ने बताया कि सैनिक को सफलतापूर्वक बचा लिया गया है और उसका इलाज व पुनर्वास जारी है, अब उसकी जान को कोई खतरा नहीं है।
यूक्रेन की सेना में बढ़ रही है ड्रोन की जरूरत
यूक्रेन सप्लाई पहुंचाने और खुले इलाकों से घायलों को निकालने के लिए मानवरहित ग्राउंड वाहनों पर तेजी से निर्भर हो रहा है। बारूदी सुरंगें, कीचड़ और गड्ढों वाला इलाका ग्राउंड रोबोट्स को घायल सैनिकों तक पहुंचने से रोकते हैं जबकि दुश्मन के ड्रोन और तोपखाने सीमावर्ती इलाकों में मूवमेंट को खतरनाक बनाते हैं। ऐसे में एरियल प्लेटफॉर्म ग्राउंड बाधाओं को बायपास कर दुर्गम जगहों तक पहुंचने का एक विकल्प देता है।
यह ऑपरेशन क्यों इतना अहम है
यह मिशन आधुनिक युद्धक्षेत्र से घायल सैनिकों को निकालने के तरीके में बड़े बदलाव का संकेत देता है। यह तरीका हेवी-लिफ्ट ड्रोन की भूमिका को सिर्फ सप्लाई और उपकरण ढोने तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसे और आगे बढ़ा सकता है। अगर इन प्लेटफॉर्म्स को फ्रंटलाइन पर नियमित इस्तेमाल के लिए सफलतापूर्वक विकसित कर लिया जाता है, तो ये मिलिट्री कमांडरों को उन जगहों से भी घायल जवानों को निकालने का अतिरिक्त विकल्प देंगे, जहां जमीनी वाहन नहीं पहुंच सकते। हालांकि इस तकनीक की कुछ अहम सीमाएं भी हैं। फुटेज में सैनिक विमान के नीचे लटका हुआ नजर आ रहा है, जिससे उड़ान के दौरान वह असुरक्षित रहता है। हार्नेस पर आधारित यह तरीका बेहोश जवानों या खुद को सुरक्षित करने में असमर्थ घायलों के लिए मुश्किल साबित हो सकता है।




















