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दो साइकलिस्ट ने 24 दिन में पूरी की 3,000 किमी की नर्मदा परिक्रमा, सिर्फ एक दिन किया विश्राम

नर्मदा परिक्रमा : विशेष नियमों का किया पालन, परिक्रमा की बात सुनकर पैसे नहीं लेते थे दुकानदार

भोपाल के दो युवा साइकलिस्ट महेश कुमार खुराना और हेमंत खरे ने साइकिल से नर्मदा परिक्रमा पूरी की है। खास बात यह है कि कुल 24 दिन में एक दिन का विश्राम लेते हुए सिर्फ 23 दिन में लगभग 3,000 किमी साइकिल से यात्रा की। महेश खुराना पेशे से व्यवसायी हैं और हेमंत खरे मप्र अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड में कार्यरत हैं। दोनों साइकलिस्ट के लिए यह जीवन का यादगार अनुभव बना, क्योंकि नर्मदा का अलौलिक सौंदर्य और रास्ते में मिलने वाले प्राचीन मंदिर और पुरातात्विक धरोहरें मनोबल बढ़ा रही थीं। महेश कहते हैं, हमें थकान जैसा कुछ महसूस नहीं हुआ क्योंकि मन में संकल्प की शक्ति थी। हमने 1 फरवरी को नर्मदा परिक्रमा यात्रा बांद्राभान से प्रारंभ की थी। इससे पहले इंडियन आर्मी और लेह गवर्नमेंट द्वारा आयोजित फ्रोजन मैराथन में भाग लेने पर गिनीज बुक में नाम दर्ज करा चुके हैं।

बांद्राभान घाट पर पूरी की नर्मदा परिक्रमा

साइकिल से नर्मदा परिक्रमा करने वाले शहर के दोनों साइकलिस्ट जबलपुर के ग्वारीघाट से होते हुए अमरकंटक पहुंचे, यहां मां नर्मदा कुंड से मैया की बगिया में तट परिवर्तन की पूजा कर, महाराजपुर मंडला होते हुए हंडिया पहुंचे, जो कि मैया का नाभि स्थान है। वहां से प्रकाशा महाराष्ट्र होते हुए शूलपाणि की झाड़ी से राजपिप्ला होते हुए गुजरात में अंकलेश्वर से खंभात की खाड़ी पहुंचे। यहां मां नर्मदा, रेवा सागर में विलीन होती है। साइकलिस्ट्स ने मैया को पार करने के लिए नाव में अपने साथ साइकिल लेकर रेवा सागर पार किया। वहां से भरुच होते हुए स्टैचू ऑफ यूनिटी देखते हुए बडवाह से नेमावर होते हुए बांद्राभान घाट पर नर्मदा परिक्रमा 24 फरवरी को पूरी की।

जमीन पर ही सोए, हर दिन नर्मदाजी में किया स्नान

हमारे सफर में रोचक बात यह रही कि जब दुकानदारों को पता चलता था कि हम नर्मदा परिक्रमा कर रहे हैं तो हमारे जिद करने के बावजूद खाने व नाश्ते के पैसे नहीं लेते थे। 23 दिन की यात्रा में प्रतिदिन दोपहर और रात्रि की भोजन प्रसादी आश्रमों में ही ग्रहण की। इन दिनों हम जमीन पर ही सोए। रास्ते में मिलने वाले आश्रमों में ही रात्रि विश्राम किया। प्रतिदिन सुबह 5 बजे नर्मदाजी में स्नान किया। हम हर दिन 120 किमी साइकिल चलाते थे। – हेमंत खरे, साइकलिस्ट

मैया को नहीं कर सकते पार, दाहिने तरफ ही चले

हमने रास्ते में कई साधु संतों के दर्शन किए। कुल 3000 किमी की परिक्रमा यात्रा में कच्चे-पक्के और जंगल-झाड़ी के रास्ते पार किए। नो प्लास्टिक और हरित संसाधन के इस्तेमाल पर जोर देने के उद्देश्य से यात्रा पूर्ण की गई। मां नर्मदा जी परिक्रमा में कुछ विशेष नियम का पालन करना आवश्यक होता है। मैया को पार नहीं कर सकते। मैया हमेशा आपके दाहिने हाथ की तरफ रहना चाहिए और जहां से परिक्रमा शुरू की है, वहीं पूर्ण करना होती है। – महेश खुराना, साइकलिस्ट

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