
मयंक तिवारी-जबलपुर। ‘हमने कुछ लोगों से कर्ज लिया था, सोचा था फसल बेचकर चुका देंगे, पर न तो फसल बच, न अभी तक मुआवजा मिला…फसल कोई खरीद नहीं रहा। हम दाम कम करके भी बेचने तैयार हैं पर कोई ले नहीं रहा..’ यह व्यथा उमरिया के उन किसान परिवारों की है, जिन्होंने अपने खेतों में कोदो- कुटकी (मिलेट्स) लगाई थी।
उमरिया के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 10 हाथियों की मौत फंगस लगी कोदो खाने से हुई है। इसके बाद से उमरिया से व्यापारियों ने दाम कम करने के बाद भी कोदो खरीदना ही बंद कर दिया है। वन विभाग ने घटनास्थल के पास की करीब 10 हेक्टेयर में लगी कोदो को नष्ट कर दिया। वहीं अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि मुआवजा मिलेगा या नहीं।
…और विभागों के अपने-अपने तर्क
हमारे पास ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है कि वहां पर कोदो की फसल उजाड़ने के लिए कोई ट्रैक्टर चलाया गया है। इस विषय में वन विभाग से बात करें। – डीके जैन, कलेक्टर उमरिया
जिले में 10 हजार से अधिक किसानों ने कोदो की खेती की है। योजना के तहत प्रोत्साहन राशि किसानों को दी जाएगी। फसल बिकने की समस्या को लेकर शासन को बताएंगे। -संग्राम सिंह, उपसंचालक कृषि, उमरिया
जंगली हथियों से कोदो की फसल का जो नुकसान हुआ है, उसके मुआवजे के लिए राजस्व विभाग के साथ मिलकर कलेक्टर के निर्देशन में विस्तृत कार्य योजना बनाई जा रही है। – प्रकाश वर्मा, डिप्टी डायरेक्टर बांधवगढ़ नेशनल पार्क
मैंने 3 एकड़ में कोदो की फसल लगाई थी। कुछ हाथियों ने खराब कर दी, बाकी वन विभाग ने ट्रैक्टर चलाकर नष्ट कर दी। कुछ बची फसल हमने काट ली थी, लेकिन व्यापारी उसे नहीं खरीद रहे हैं। हम प्रशासन से मांग करते हैं कि हमारी फसल खरीदी जाए और खराब फसल का मुआवजा दिया जाए। – गुबारी बैगा, किसान सलखनिया
हमारे साथ दोहरी मार हो गई। आधी फसल हाथी खा गए और कुछ फसल वन विभाग ने नष्ट कर दी। किसानों से व्यापारी कोदो की उपज नहीं खरीद रहे हैं। वन विभाग द्वारा नष्ट की गई फसल का अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। हमारा परिवार संकट में है। प्रशासन हमारी समस्या का समाधान करे। – निखेललाल बैगा, किसान धमोखर