
संजय कुमार तिवारी-जबलपुर। देशभर में दिवाली 31 अक्टूबर को मनाई जा रही है, लेकिन मध्यप्रदेश के मंडला जिले के धनगांव, गड़बिसोरा और पद्दीकोना बैगाटोला ऐसे गांव हैं, जहां हर साल दिवाली एक दिन पहले ही मना ली जाती है। इसके पीछे ग्रामीणों की अपनी मान्यता और परंपरा है। ग्रामीणों का मानना है कि त्योहार के दिन पर्व मनाने से उनके घर- परिवार में अनहोनी हो जाती थी। गांव में प्राकृतिक आपदा आ जाती थी। गांव में आग लग जाती थी या फिर गांव में तेज बारिश हो जाती थी। इसलिए पूर्वजों ने एक दिन पहले त्योहार मनाना शुरू कर दिया।
धनगांव के 80 वर्षीय दादूलाल बताते हैं कि उनके परदादा ने बताया था कि करीब 150 साल पहले दिवाली पर तीन दिन लगातार इतनी तेज बारिश हुई थी कि गांव की पूरी फसल बर्बाद हो गई थी। इसी दौरान चार लोगों की मौत भी हो गई थी। इसके बाद दूसरे साल दिवाली पर गांव में कई घरों में आग लग गई थी, जिससे कई मवेशियों की मौत हो गई थी और गृहस्थी का सामान नष्ट हो गया था। अनहोनी के डर से दिवाली के दिन त्योहार मनाना बंद कर दिया था और तब से एक दिन पहले ही त्योहार मनाने लगे।
चली आ रही है परंपरा
बुजुर्ग बताते थे कि त्योहार के दिन हमारे घर में आग लग गई थी। गांव में मौतें और बीमारियां न हों इसलिए एक दिन पहले ही दिवाली मनाते आ रहे हैं। मेरी उम्र 55 साल है, जब से मैंने होश संभाला है, गांव में त्योहार एक दिन पहले ही मनाते हैं। -तेजीलाल भारतीया, ग्रामीण धनगांव
गांव में ऐसी मान्यता है
गांव में ऐसी मान्यता है कि कई वर्ष पूर्व दीवाली के त्योहार के दिन गांव में लगातार अनिष्ट होता था। अनिष्ट की आशंका के चलते त्योहार एक दिन पहले ही मना लेने की परंपरा चल पड़ी, जो आज भी जारी है। -डीके सिंगौर, शिक्षक