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क्या है तिरुपति लड्डू विवाद : CM नायडू के बयान के बाद देशभर में गहराई राजनीति, जानें पूरा मामला

अमरावती। लाखों-करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र तिरुपति तिरुमाला मंदिर के लड्डू प्रसादम की पवित्रता और शुद्धता को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। लड्डू प्रसादम में इस्तेमाल किए जाने वाले घी में जानवरों की चर्बी और फिश ऑयल होने की पुष्टि हुई है। इसको लेकर अब देशभर में राजनीति तेज हो गई है। आंध्र प्रदेश के सीएम नायडू ने कहा कि, इस अनियमियता में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

क्या है पूरा मामला

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और TDP सुप्रीमो एन चंद्रबाबू नायडू ने 18 सितंबर को जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली पिछली YSRCP सरकार पर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि, विश्व प्रसिद्ध तिरुपति के लड्डू में पशुओं की चर्बी के इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने कहा कि जगन मोहन सरकार ने प्रसादम की पवित्रता खंडित कर दी है। सीएम नायडू ने एनडीए विधायक दल की बैठक को संबोधित करते हुए यह दावा किया।

चंद्रबाबू ने कहा कि, पिछले 5 साल में YSRCP के नेताओं ने तिरुमाला के पवित्र लड्डू में घी की जगह जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल किया। हालांकि, अब हम प्रसादम में शुद्ध घी का इस्तेमाल कर रहे हैं।

TDP प्रवक्ता ने दिखाई रिपोर्ट

TDP प्रवक्ता अनम वेंकट रमना रेड्डी ने 19 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लड्डो पर एक लैब रिपोर्ट सार्वजनिक की। जिसमें चर्बी और बीफ होने की पुष्टि की होने की बात कही गई है। 12 जुलाई, 2024 को गुजरात स्थित लाइवस्टॉक लैबोरेटरी, NDDB (नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड बोर्ड) CALF लिमिटेड (सेंटर फॉर एनालिसिस एंड लर्निंग इन लाइवस्टॉक एंड फूड) को सैंपल भेजा गया था। जिसकी लैब रिपोर्ट 23 जुलाई को मिली।

गुजरात की नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड लैब की रिपोर्ट में सामने आया है कि, लड्डू में गोमांस और मछली के तेल का इस्तेमाल किया गया है। नमूनों में लार्ड (सूअर की चर्बी से संबंधित) का भी जिक्र है। इस खुलासे के बाद आंध्र प्रदेश में सियासी तूफान आ गया है। सीएम एन चंद्रबाबू नायडू ने वाईएस जगन मोहन रेड्डी पर आरोप लगाया कि उनकी पिछली सरकार ने लड्डू तैयार करने के लिए घी की जगह जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल किया।

बदल दिया सप्लायर

रिपोर्ट सामने आने के बाद आंध्र की वर्तमान सरकार ने सप्लायर को बदल कर कर्नाटक की नंदिनी को यह काम दिया है। नायडू ने कहा कि जिस कंपनी से घी लिया जा रहा था, उससे करार खत्म कर ब्लैक लिस्ट कर रहे हैं। एक साल पहले ही कंपनी को सप्लाई का टेंडर मिला था। वहीं अब मामले की जांच विजिलेंस को सौंप दी गई है।

राज्य सरकार करती है मंदिर समिति का गठन

इस पूरी व्यवस्था का संचालन उस समिति द्वारा किया जाता है, जिसका गठन हर दो साल में आंध्र प्रदेश की राज्य सरकार करती है। समिति का नाम है तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी)। यही समिति प्रसाद के लड्डू बनाने के लिए सामग्री खरीदती है। समिति के स्वयंसेवक इन लड्डुओं को श्रद्धालुओं को बेचते हैं।

300 साल पुराने किचन में रोजाना बनते हैं 3.5 लाख लड्‌डू

तिरुपति मंदिर दुनिया के सबसे लोकप्रिय और अमीर धर्मस्थलों में से है। यहां करीब 70 हजार श्रद्धालु हर दिन भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन करने पहुंचते हैं। तिरुपति मंदिर में लड्डू पोटू एक रसोईघर है, जहां पर लड्डू तैयार किए जाते हैं। मंदिर परिसर में बनी 300 साल पुरानी किचन ‘पोटू’ में रोजाना शुद्ध देसी घी के करीब 3.50 लाख लड्‌डू बनते हैं। लड्‌डू मंदिर का मुख्य प्रसाद है, जिसे करीब 200 ब्राह्मण बनाते हैं।

इस प्रसाद को बनाने के लिए शुद्ध बेसन,काजू, किश्मिश, बूंदी,  मिश्री, घी, इलायची आदि को मिलाया जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हर रोज प्रसाद तैयार करने के लिए 10 टन बेसन, 10 टन चीनी, 700 किलो काजू, 150 किलो इलायची, 300 से 400 लीटर घी, 500 किलो मिश्री, 540 किलो किश्मिश आदि का इस्तेमाल किया जाता है। बता दें कि, ट्रस्ट ने करीब एक लाख लड्‌डू राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के वक्त अयोध्या भेजे थे।

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