तिरुपति लड्डू कॉन्ट्रोवर्सी : विवाद पर किसने क्या बोला, पढ़िए वेद-पुराणों में क्या है प्रसाद का महत्व

अमरावती। आंध्र प्रदेश के मशहूर तिरुपति मंदिर में लड्डू प्रसादम पर शुरू हुआ विवाद लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। पूर्व सीएम और मौजूदा सीएम समेत कई पॉलिटिकल पार्टियां लगातार इसको लेकर बयान जारी कर रहे हैं। वहीं अब पूर्व सीएम जगन मोहन रेड्डी ने रिपोर्ट को लेकर सीएम नायडू पर निशाना साधा है। लड्डू प्रसादम की शुद्धता को लेकर उठे सवालों के बीच जानते हैं कि आखिर प्रसाद कैसा होना चाहिए...
प्रसाद अब पूरी तरह से पवित्र : तिरुपति मंदिर प्रबंधन
- आंध्र प्रदेश के श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर (तिरुपति मंदिर) का मैनेजमेंट करने वाली कमेटी तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने के मुताबिक, प्रसाद अब पूरी तरह से पवित्र है।
- TTD के कार्यकारी अधिकारी जे श्यामला राव ने बताया कि, लड्डू जिस घी से बनाए जा रहे थे, उसके सैंपल्स के 4 लैब रिपोर्ट्स में जानवरों की चर्बी और फिश ऑयल के होने की पुष्टि हुई है।
- मिलावटी घी देने वाले सप्लायर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही जा रही है।
नायडू ने जुलाई की रिपोर्ट दिखाई, तब वे CM थे : रेड्डी
वहीं पूर्व सीएम जगन रेड्डी ने कहा कि, नायडू ने तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया। चंद्रबाबू नायडू ने जुलाई की रिपोर्ट दिखाई है, उस समय वे सीएम बन चुके थे। नायडू राजनीतिक फायदे के लिए भगवान का इस्तेमाल कर रहे हैं। जगन रेड्डी ने कहा कि, वे प्रधानमंत्री मोदी और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ को लेटर लिखकर नायडू के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे।
CM नायडू ने लगाए थे ये आरोप
18 सितंबर को CM नायडू ने आरोप लगाया था कि, पूर्व जगन सरकार में तिरुपति मंदिर के लड्डू में इस्तेमाल होने वाले घी में जानवरों की चर्बी और फिश ऑयल मिलाया गया था। एक लैब रिपोर्ट दिखाकर TDP ने अपने आरोपों की पुष्टि का दावा भी किया।क्या होता है प्रसाद
- प्रसाद शब्द 3 अक्षरों से बना है। जिसमें प्र का अर्थ है परमात्मा, सा का अर्थ है साक्षात और द यानि दर्शन। जिसका पूरा अर्थ है परमात्मा का साक्षात दर्शन।
- भगवान को भक्तिभाव के साथ अर्पित करने के बाद जो भोग वितरित किया जाता है उसे प्रसाद कहते हैं।
- इसमें पवित्रता का भी उतना ही महत्व है जितना भावना का। किसी प्रसाद का संबंध बलि या तामसिक भोजन से नहीं होता, न ही उसमें मांसाहार मिलाने की छूट होती है।
- भारत में देवी देवताओं को चढ़नेवाला प्रसाद सात्विक ही होता है।
- वेद और पुराणों की मानें तो मांसाहार और बलि हिंदू धर्म का हिस्सा नहीं है। धर्म की आड़ में इसे खाने की मनाही है। देवी देवता जीवन दायक होते हैं जीवन लेते नहीं।
- कृष्ण ने भी गीता में कहा है कि मांसाहारी भोजन मानवों के लिए नहीं है।
- शिव पुराण कहता है कि भक्त को मांस मदिरा से दूर रहना चाहिए।




















