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12 जिलों के 27 निकायों में भारी जल संकट, अब गांवों की परियोजनाओं के सहारे शहर

इन जगहों पर नदी-तालाबों ने दिए जवाब, 20 किमी दूर से पानी लाने की तैयारी

अशोक गौतम-भोपाल। चित्रकूट में जिस मंदाकिनी नदी को ऋषि अत्री की प्यास बुझाने के लिए अनुसुईया ने प्रकट किया था, आज वही नदी दम तोड़ रही है। इस नदी से धार टूटते देख अब 150 किमी दूर बाणसागर बांध से शहर में पानी लाने की तैयारी की जा रही है। यह तो सिर्फ एक उदाहरण है, प्रदेश में 27 से अधिक निकाय ऐसे हैं, जहां नदियां और तालाब तो हैं, लेकिन वहां के लोगों की प्यास बुझाने में सक्षम नहीं हैं।

कई निकाय जल संकट से जूझ रहे हैं। जैसे ही गर्मी आती है तो इन शहरों में पानी के लिए मारामारी शुरू हो जाती है। मार्च से ही कहीं एक दिन छोड़कर तो कहीं दो दिन छोड़कर पानी सप्लाई की जाती है। करीब 50 से 60 लाख से अधिक आबादी पानी के लिए चार महीने इधर-उधर भटकती है।

तस्वीर बिशनखेड़ी की है…

पानी के बर्तन लेकर बैठीं ये महिलाएं रोज दो किमी दूर से पानी लेकर आती है। रविवार को ये महिलाएं पंचायत ऑफिस पहुंची पर यहां ताला लगा हुआ था। इसके बाद ये वही पास स्थित मकान के सामने बैठ गईं।

सीहोर जिले में 200 फीट तक गिरा जलस्तर

अभी मार्च की शुरुआत ही हुई है और सीहोर जिले में जल संकट गहराने लगा है। ये हालात जिले के बिशनखेड़ी, रायपुर, नयाखेड़ा, बिलकिसगंज और आसपास के गांवों में हैं। यहां जलस्तर 150 से 200 फीट तक गिर चुका है। इस वजह से हैंडपंप सूखने लगे हैं। हालात ये हैं कि गांव की महिलाएं और बच्चे दो किमी दूर स्थित कुएं से पानी लाने को मजबूर हैं। क्षेत्र के समाजसेवी एमएस मेवाड़ा ने बताया कि इस बार मावठ नहीं गिरने से इस बार ऐसे हालात बने हैं। गांव के मोहनलाल ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से नए नलकूप खनन की मांग की। रविवार को बिशनखेड़ी गांव की महिलाएं खाली बर्तन लेकर पंचायत भवन पहुंचीं। मालती ने बताया कि हम पानी के लिए रोज परेशान हो रहे हैं पर कोई व्यवस्था नहीं हो रही है। हालांकि सरपंच ने सभी को आश्वासन दिया है।

सभी निकायों में 12 हजार करोड़ से तैयार करेंगे नेटवर्क

भोपाल, इंदौर सहित सभी 413 नगरीय निकायों में पानी सप्लाई का नेटवर्क तैयार करने के लिए जल जीवन मिशन के तहत 12 हजार करोड़ रुपए का प्लान तैयार किया गया है। इनं निकायों में भारी जलसंकट: कोठरी, रेहटी (सीहोर जिला), कुंभराज (गुना जिला), माचलपुर, जीरापुर, छापीहेड़ा (राजगढ़ जिला), नागौद , चित्रकूट (सतना जिला) , त्योंथर , हनुमना और बैकुंठपुर ( रीवा जिला), रतनगढ़ ( दतिया जिला), अशोकनगर, सिंगरौली आदि।

जल निगम से लेंगे मदद

इन निकायों में पानी सप्लाई के लिए मप्र जल निगम की परियोजनाओं का सहारा लेने पर विचार किया जा रहा है। जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में पानी सप्लाई के लिए करीब 200 सामूहिक जल प्रदाय की बड़ी परियोजनाएं तैयार की जा रही हैं। इन्हीं परियोजनाओं से शहरी जल सप्लाई को जोड़ा जाएगा। इसमें जो लागत आएगी, उसकी राशि का कुछ प्रतिशत नगरीय विकास एवं आवास विभाग को देना होगा। इस संबंध में जल निगम और नगरीय विकास एवं आवास विभाग की संयुक्त बैठक हो गई है।

27 निकायों में जलस्रोत नहीं

प्रदेश में 27 से अधिक शहर ऐसे हैं, जिनमें स्थानीय स्तर परऐसे जल स्रोत नहीं हैं, जिनके जरिए पानी की सप्लाई वर्ष भर हो सके। जल निगम से बात कर सप्लाई की व्यवस्था की जा रही है। -प्रदीप मिश्रा ,ईएनसी, नगरीय विकास एवं आवास विभाग

परियोजना में कर रहे शामिल

जल जीवन मिशन के तहत घर घर नल से जल परियोजना में कुछ शहरों को पानी देने का प्रस्ताव आया है। इन शहरों को पानी सप्लाई के हिसाब से परियोजना में शामिल किया जा रहा है। -एके अंधवान, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, मप्र जल निगम मर्यादित

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