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देश की 28 नदियों में 6 हजार से ज्यादा डॉल्फिन, टॉप पर है यूपी

सरकार के प्रोजेक्ट डॉल्फिन के लिए 8 राज्यों में किया गया सर्वे
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देश की 28 नदियों में 6 हजार से ज्यादा डॉल्फिन, टॉप पर है यूपी

नई दिल्ली। देश में कुल 6,327 रिवर डॉल्फिन हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 2,397 डॉल्फिन हैं, उसके बाद बिहार (2,220) है। अनुमान के अनुसार है दुनिया की 90 फीसदी डॉल्फिन गंगा में रहती हैं। रिवर डॉल्फिन का यह पहला आंकड़ा है। हालांकि भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों ने 2018 में एक अध्ययन किया था। इस अध्ययन के मुताबिक 19वीं सदी के बाद से डॉल्फिन की प्रजातियों की संख्या में कम से कम 50-65 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

प्रोजेक्ट डॉल्फिन के लिए आठ राज्यों की 28 नदियों का सर्वेक्षण किया गया, जिसमें 3,150 दिन लगे और 8,500 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को कवर किया गया। गंगा नदी में कभी हजारों की संख्या डॉल्फिन मौजूद थीं। इनकी आबादी कई कारणों से घट गई। इसमें सीधे तौर पर उनकी हत्या, बांधों और बैराजों से उनके आवास का विखंडन और अंधाधुंध मछली पकड़ना शामिल है। रिवर डॉल्फिन की जनसंख्या के अनुमान से पता चलता है कि उनमें से ज्यादातर लगभग 90 प्रतिशत या तो गंगा नदी या ब्रह्मपुत्र नदी में रहती है। सिर्फ तीन ही ब्यास नदी में पाई गई हैं। गंगा में 3,275 डॉल्फिन हैं, वहीं, गंगा की सहायक नदियों में 2,414, ब्रह्मपुत्र में 584, ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियों में 51 और ब्यास नदी में 3 डॉल्फिन रहती हैं।

क्या है प्रोजेक्ट डॉल्फिन

प्रोजेक्ट डॉल्फिन भारत में डॉल्फिन की रक्षा के लिए शुरू किया गया एक वन्यजीव संरक्षण परियोजना है। इस परियोजना की शुरुआत 2021 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा की गई थी। वन्यजीव कार्यकर्ताओं की मांग के बाद, 2021 में नदी और समुद्री दोनों डॉल्फिन प्रजातियों के संरक्षण के लिए भारत सरकार की पहल के रूप में प्रोजेक्ट डॉल्फिन लॉन्च किया गया था।

इस वर्ष देशभर में शेरों की भी होगी गणना

इससे पहले डॉल्फिन को लेकर आकलन रिपोर्ट पीएम नरेंद्र मोदी की तरफ से विश्व वन्यजीव दिवस पर गुजरात के सासन गिर में जारी की गई। पीएम ने यहां राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता की। इसमें विभिन्न प्रजातियों के लिए कई पहलों की घोषणा की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने इस वर्ष शेरों के आकलन के नए चक्र की शुरुआत की घोषणा की। इसके साथ ही, मध्य प्रदेश के गांधीसागर अभयारण्य और गुजरात के बन्नी घास के मैदानों में चीता के आवास का विस्तार की भी घोषणा हुई। दूसरी तरफ, कोयंबटूर के एसएसीओएन (सलीम अली पक्षी विज्ञान और प्राकृतिक इतिहास केंद्र) में भारतीय वन्यजीव संस्थान परिसर में उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की बात भी कही गई।

People's Reporter
By People's Reporter

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