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चुनाव परिणाम से गिरे शेयर बाजार का ऐसा सदमा कि रात-दिन करते हैं गुणा-भाग

एक दिन में लाखों रुपए गंवाने पर लोगों को हुआ स्टॉक मार्केट एंजायटी सिंड्रोम

प्रवीण श्रीवास्तव/भोपाल। एग्जिट पोल के बाद उछले और लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद गिरे शेयर बाजार से कई निवेशकों को ऐसा सदमा लगा कि वह अभी तक उबर नहीं पाए हैं। एक दिन में लाखों रुपए गंवाने के कारण उनकी नींद उड़ गई। दिन में बार- बार उंगलियों पर हिसाब-किताब करते नजर आते हैं। मनोवैज्ञानिक इस स्थिति को स्टॉक मार्केट एंजायटी सिंड्रोम कहते हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है कि कई बार अचानक हुआ नुकसान लोगों के दिमाग पर इतना असर करता है कि उन्हें मानसिक समस्या तक हो जाती है। मनोचिकित्सकों के पास इस तरह के मामले अभी भी पहुंच रहे हैं। लोकसभा चुनावों के बाद एग्जिट पोल ने बीजेपी के बंपर जीत की भविष्यवाणी की थी, नतीजा शेयर बाजार भी अचानक बढ़ गया। ऐसे में लोगों ने लाखों रुपए का निवेश कर दिया। चुनाव नतीजों के बाद शेयर बाजार करीब 6000 अंक से ज्यादा गिर गया। इससे निवेशकों के करीब 3200 करोड़ रुपए डूब गए। इस भारी नुकसान का कई लोगों के दिमाग पर असर हुआ है।

केस 1

59 वर्षीय रविकांत श्रीवास्तव शेयर कारोबारी हैं। लोकसभा चुनाव रिजल्ट के बाद शेयर बाजार में आई गिरावट से रविकांत को करीब 40 लाख का नुकसान हो गया। एक दिन में इतने बड़े नुकसान ने उनके दिमाग पर गहरा असर किया। अब वह इतना डर चुके हैं कि शेयर बाजार थोड़ा भी नीचे गिरता है, तो उनमें घबराहट बढ़ जाती है, एंजायटी अटैक आने लगते हैं।

केस 2

45 साल के सतीश भी शेयर बाजार में निवेश करते हैं। वे दिनरात मोबाइल और टीवी पर बाजार के उतार-चढ़ाव का आकलन करते रहते थे। चुनावों के बाद हुए नुकसान की भरपाई के लिए उन्होंने और निवेश कर दिया। हालांकि इसका असर यह हुआ कि लगातार मोबाइल देखने से उनकी नींद ही उड़ गई। वे दिन में गुमसुम बैठे-बैठे उंगलियों पर हिसाब लगाते रहते हैं।

5 दिन गिरावट पर 1.5% बढ़ती है समस्या

जबलपुर की मनोचिकित्सक डॉ. अवंतिका वर्मा बताती हैं कि जब शेयर बाजार लगातार पांच दिनों तक गिरता है, तो मानसिक समस्याओं के मरीजों की संख्या 1.5 फीसदी बढ़ जाती है। दरअसल, शेयर बाजार मध्यम आयु वर्ग के पुरुषों के भावनात्मक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है। कई स्टडी बताती हैं कि एक दिन में स्टॉक इंडेक्स में एक प्रतिशत की गिरावट भी मानसिक रूप से बीमार कर सकती है।

बाजार में गिरावट से यह होती हैं दिक्कतें

चिंता में वृद्धि, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन या यहां तक कि एनोरेक्सिया जैसे खाने के विकारों जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। चिढ़चिढ़ापन, गुस्सा भी बढ़ने लगता है।

एक्सपर्ट व्यू

स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव का ऐसा प्रभाव विश्व में कई देशों में लगातार देखा गया। कुछ निवेशक चिंतित महसूस करते हैं और जब शेयर वापस उछलते हैं, तब भी उन्हें नींद नहीं आती। इन प्रभावों को कम होने में समय लगता है। कई बार देखा गया है कि भारी वित्तीय नुकसान के दो साल बाद भी, क्लीनिकल डिप्रेशन की स्थिति बनी रहती है। लोकसभा चुनाव के बाद से उनके पास ऐसे तीन केस आ चुके हैं। – डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी, वरिष्ठ मनोचिकित्सक

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