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रेप पीड़ित बच्चियों की व्यथा...सालों बाद भी उबर नहीं पाईं, अनजान को देख सिहर उठती है

मनोचिकित्सक कर रहे काउंसलिंग, इधर गुना की दुष्कर्म पीड़ित बच्ची गंभीर
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रेप पीड़ित बच्चियों की व्यथा...सालों बाद भी उबर नहीं पाईं, अनजान को देख सिहर उठती है

प्रवीण श्रीवास्तव-भोपाल। गुना के म्याना थाना क्षेत्र में बुधवार को 10 साल की बच्ची से दुष्कर्म का मामला सामने आया था। बच्ची की हालत गंभीर है, उसका इलाज हमीदिया अस्पताल में चल रहा है। प्रदेश में हर माह इस तरह के 2 से 6 केस दर्ज हो रहे हैं। यह हाल तब है, जबकि प्रदेश में 12 साल या उससे कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार के दोषियों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान है। बावजूद बच्चियों से यौन अपराध नहीं थम रहे। डॉक्टर कहते हैं-ऐसे मामलों में बच्चियों को शारीरिक कष्ट से ज्यादा मेंटल ट्रॉमा से गुजरना पड़ता है। घटना के 8 से 10 साल बाद भी बच्चियां डर के साए में जीती हैं। इस दंश को झेल चुकी बच्चियों ने पीपुल्स समाचार के माध्यम से अपना दर्द बयां किया।

मप्र मेें 2022 में बच्चों के खिलाफ 758 केस

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीईआरबी) की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। वर्ष 2022 में देश भर में 1,62,449 मामले दर्ज किए गए, जो 2021 के मुकाबले 8.7 प्रतिशत अधिक है। इसमें मप्र की स्थिति भी गंभीर है। अकेले राजधानी भोपाल में साल 2022 में बच्चों के खिलाफ 758 मामले दर्ज हुए।

इन दो उदाहरणों से समझिए पीड़ित बच्चियों की व्यथा

केस 1 : तीन साल की उम्र में दुष्कर्म का शिकार हुई शक्ति (परिवर्तित नाम) अब 14 साल की हो चुकी है, लेकिन हमेशा डरी-सहमी रहती है। अनजान व्यक्ति को देखकर डर जाती है। मां के अनुसार, कोई उससे बात करे तो छोटी बच्ची की तरह गोद में सिमट जाती है। शक्ति हमेशा घर में दुबकी रहती है, उसके साथ के बच्चे बाहर खेलते हैं, लेकिन अनजान डर उसे घर की दहलीज पार नहीं करने देता। बच्ची की मां ने बताया कि उसके मुंहबोले चाचा ने उसे जिंदगी भर का दर्द दे दिया है। घटना के वक्त बच्ची छोटी थी, इसलिए उसे पता भी नहीं है कि उसके साथ क्या हुआ। वह सहमी रहती है। घर में कोई रिश्तेदार या अनजान व्यक्ति आ जाए तो कांप जाती है। हमीदिया अस्पताल के चिकित्सक उसके मन से डर निकालने के लिए काउंसलिंग कर रहे हैं, लेकिन खास फायदा नहीं हुआ। डॉक्टर का कहना है कि हमेशा घर में रहने और लोगों से बात न करने का असर उसके शारीरिक और मानसिक स्तर पर भी हुआ है।

केस 2 : 17 साल की दुर्गा (परिवर्तित नाम) को जिंदगी भर का दर्द उस वक्त मिला था, जब वह सिर्फ छह साल की थी। दुर्गा की मां बताती हैं कि पड़ोस के व्यक्ति ने दुर्गा के साथ हैवानियत की थी। जख्मी हालत में उसे भोपाल भेज दिया गया, यहां ऑपरेशन हुआ। तब डॉक्टरों ने बताया था कि ये कभी मां नहीं बन सकेगी। दुर्गा के जेहन में घटना की धुंधली यादें हैं। उसने बड़े संकोच के साथ बताया कि पास में रहने वाले अंकल उसे कहीं ले गए और जबरदस्ती की। मैंने चिल्लाना चाहा तो उन्होंने मुझे पीटने की कोशिश भी। यह बताते हुए वह भी मां के पास दुबक कर बैठ गई। मां ने बताया कि दुर्गा को नहीं पता कि उस घटना का उसके शरीर पर क्या असर हुआ है? हम उस बारे में कभी बात नहीं करते। आज भी दुर्गा को उस घटना के सपने आते हैं। दुर्गा की मां कहती है, मेरी बेटी दूसरे के गुनाह की सजा भुगत रही है। उसकी उम्र शादी लायक हो गई, लेकिन हम मजबूर हैं। वह कभी मां नहीं बन सकती। यह कहते ही दुर्गा मां की आंखों से आंसू छलक पड़ते हैं।

गुना मामला : बच्ची की स्थिति गंभीर

जब यह बच्ची आई तो हम अंदर तक सहम गए। बच्ची की स्थिति बहुत गंभीर थी, वेजाइनल पार्ट बुरी तरह से जख्मी था। चोट अंदरूनी हिस्सों तक थी। हमारा पहला प्रयास ऑपरेशन कर उसके घावों को भरना है। एक हफ्ते उसे निगरानी में रखा जाएगा। इसके बाद उसकी मानसिक स्थिति पर काम किया जाएगा। - डॉ. धीरेंद्र श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, पीडियाट्रिक सर्जरी, हमीदिया अस्पताल

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