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पैदा होते ही मां ने जिसे मरने के लिए झाड़ियों में फेंक दिया, वह अब बिखेर रही है ‘खुशी’

सूखी सेवनिया में झाड़ियों से 10 दिन पहले मिली नवजात पूरी तरह स्वस्थ
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पैदा होते ही मां ने जिसे मरने के लिए झाड़ियों में फेंक दिया, वह अब बिखेर रही है ‘खुशी’

भोपाल। 15 अगस्त को जब देश भर में आजादी का जश्न मनाया जा रहा था, तब राजधानी के सूखी सेवनिया थाना क्षेत्र में झाड़ियों में एक नवजात जीवन के लिए संघर्ष कर रही थी। जन्म के बाद शायद मां ने ही उसे फेंक दिया था। वहां से गुजर रहे एक राहगीर की नजर उस पर पड़ी, तो पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने गंभीर अवस्था में उसे हमीदिया अस्पताल पहुंचाया। उपचार के बाद अब बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है। स्टाफ ने इस बच्ची को ‘खुशी’ नाम दिया है। अस्पताल ने शुक्रवार को बच्ची को चाइल्ड लाइन संस्था को सौंप दिया। यहां से बच्ची को नया घर मिल जाएगा। नवजात का इलाज करने वाले डॉ. धीरेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि जब वह लाई गई थी, तो उसकी स्थिति बेहद नाजुक थी। सिर में इंटरनल चोट के साथ मल्टीपल इंजुरी थी। अब वह स्वस्थ है।

मध्यप्रदेश में इस साल 17 नवजात किए गए रेस्क्यू

108 एंबुलेंस के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह के मुताबिक, इस साल प्रदेश में अब तक 17 ऐसे मामले आ चुके हैं, जिसमें नवजात को रेस्क्यू किया गया। इसके साथ ही कई बार डायल 100 और पुलिस भी सूचना के आधार पर ऐसे बच्चों को रेस्क्यू करती है। ऐसे में यह आंकड़ा और भी ज्यादा हो सकता है। सर्वाधिक मामले 2019 में दर्ज किए गए थे। उस वर्ष कुल 199 ऐसे में मामले सामने आए थे।

कांटों के बीच नवजात को देख कलेजा कांप गया

मैं रोजाना की तरह काम पर जा रहा था। सुबह 6:00 बजे घने जंगल वाले इलाके से गुजर रहा था, तभी बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। मैं चौंक गया। इधर-उधर देखा, तो कोई नजर नहीं आया। मैं आवाज की दिशा में पास ही झाड़ियों की ओर गया, तो मासूम बच्ची को देखकर दिल कांप गया। एक नवजात कांटों के बीच पड़ी थी। शरीर पर कपड़ा तक नहीं था, जगह-जगह कांटे चुभे थे और खून रिस रहा था। मैंने उसे उठाया और कांटे हटाने लगा। जैसे ही कोई कांटा हटाता, वह जोर से रोती। उसके रोने की आवाज सुनकर मेरा कलेजा कांपने लगा। मैंने 108 को कॉल किया। सूचना पर पुलिस आई और नवजात को अस्पताल लेकर गई। सच कहूं तो थोड़ी देर और वह वहां पड़ी रहती, तो कोई जंगली जानवर उसे शिकार बना लेता या वह कांटों के दर्द से मर जाती।

(इनपुट-प्रवीण श्रीवास्तव)
Javedakhtar Ansari
By Javedakhtar Ansari

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