सोहागपुर का गौरवशाली इतिहास, भगवान शिव और श्रीकृष्ण से जुड़ी ऐतिहासिक गाथाएं आज भी जीवित

सोहागपुर का गौरवशाली इतिहास, भगवान शिव और श्रीकृष्ण से जुड़ी ऐतिहासिक गाथाएं आज भी जीवित
मध्यप्रदेश का सोहागपुर, जिसे प्राचीन काल में "शोणितपुर" के नाम से जाना जाता था, एक ऐतिहासिक नगरी है। यह असुरराज बाणासुर की राजधानी हुआ करती थी, जिसने भगवान शिव को प्रसन्न कर उन्हें नगर अध्यक्ष बनने का अनुरोध किया था। भगवान शिव ने उनकी प्रार्थना स्वीकार कर पुत्रों और गणों सहित यहां निवास किया।

बाणासुर और भगवान श्रीकृष्ण का युद्ध

राजा बलि के पुत्र बाणासुर ने अपनी हजार भुजाओं के साथ त्रिलोकी पर विजय प्राप्त की थी। लेकिन जब उसे कोई योग्य प्रतिद्वंद्वी नहीं मिला, तो उसने भगवान शिव से अपनी भुजाएं कटवाने का वरदान मांगा। भगवान शिव की माया के कारण श्रीकृष्ण को शोणितपुर पर चढ़ाई करनी पड़ी और एक भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें भगवान शिव अपने भक्त बाणासुर की ओर से लड़े। अंततः श्रीकृष्ण ने जृम्भणास्त्र का प्रयोग कर बाणासुर की हजार भुजाएं काट डालीं, केवल चार छोड़कर।

शिव-पार्वती की दुर्लभ प्रतिमा

यहां एक दुर्लभ पाषाण प्रतिमा मौजूद है, जिसमें भगवान शिव, माता पार्वती और पूरा शिव परिवार दर्शाया गया है। यह प्रतिमा 1961 में हनुमान नाके पर स्थापित की गई थी और इसके ऐतिहासिक महत्व के कारण कई बार इसे चुराने के प्रयास हुए।

हर साल लगता है शिवरात्रि मेला

इस पवित्र स्थल पर हर साल महाशिवरात्रि के अवसर पर विशाल मेला आयोजित किया जाता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। सोहागपुर का यह प्राचीन इतिहास इसे धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण स्थल बनाता है।
Akriti Tiwary
By Akriti Tiwary

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