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कारम बांध से सिंचाई का सपना इस साल भी अधूरा

दो साल पहले फूटा डैम नहीं बना, धार जिले के 52 गांवों के लाखों किसान परेशान

भोपाल। धार जिले के धरमपुरी तहसील के 52 गांव के लाखों किसानों के खेत में सिंचाई की उम्मीद आज भी अधूरी है। सरकार ने किसानों को पीने और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए करीब 300 करोड़ रुपए से कारम बांध बनवाया था, लेकिन जल संसाधन विभाग और निर्माण एजेंसी की लापरवाही से यह बांध 14 अगस्त 2022 में फूट गया।

इसके बाद सरकार ने इस बांध के नए सिरे से निर्माण के लिए निर्माण एजेंसी को निर्देश दिए तो किसानों की उम्मीद जगी कि इस साल से उन्हें पानी मिलना शुरू हो जाएगा। लेकिन अभी तक इस बांध का निर्माण शुरू नहीं हुआ है। अगस्त 2022 में रिसाव होने के बाद बांध टूटने के डर से प्रशासन ने कई गांवों को रातों-रात खाली करवाया था।

नुकसान: 10 हजार हेक्टे. जमीन सिंचित होती, पानी भी मिलता

कारम बांध में 43 मिलियन घन मीटर पानी रोकने की क्षमता थी जिससे धार जिले के आस-पास के ग्रामीणों को पीने और सिंचाई के लिए सहित उद्योगों को पर्याप्त पानी मिलता था। गौरतलब है कि इस बांध से करीब 10,500 हेक्टेयर जमीन सिंचित हो जाती, जो कि अभी असिंचित है। इसका सबसे ज्यादा फायदा आदिवासी अंचल के लोगों को मिलना है जो अभी नहीं मिल रहा है।

कंपनी नहीं बना रही बांध

कंपनी को वर्ष 2023 में बांध का निर्माण नए सिरे से करना था। इसके लिए भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की तकनीकी एजेंसी के देख रेख में बांध बनाया जाना था। तकनीकी एजेंसी की टीम का यहां पर दो बार भ्रमण भी हो चुका है, लेकिन बांध का निर्माण दो वर्ष बाद भी नहीं हो पाया है। अगर बांध का निर्माण होता तो अब तक सिंचाई के लिए 52 गांव के लाखों किसानों को सिंचाई के पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ता।

रिसाव को इंजीनियरों ने गंभीरता से नहीं लिया

गौरतलब है कि गत 11 अगस्त को अचानक से इस बात की जानकारी प्रकाश में आई थी कि कारम बांध के मिट्टी वाले बांध से पानी का रिसाव शुरू हो गया है। पहले तो इस रिसाव को संबंधित इंजीनियरों ने गंभीरता से नहीं लिया। उनका कहना था कि मिट्टी बांध से इस तरह का पानी का रिसाव होना स्वाभाविक है। लेकिन 12 अगस्त को यह रिसाव जिस तेजी से बढ़ने लगा, उससे यह तय हो गया कि यह बांध एक बड़ी आपदा लेकर आ सकता है। इसके बाद गांवों को खाली कराया गया था।

15 गांव कराने पड़े थे खाली

कारम डैम से पानी का रिसाव शुरू होने के बाद सरकार हरकत में आई और बांध की डाउन स्ट्रीम के 15 गांवों को खाली कराया गया था। इसके अलावा आगरा- मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग का ट्रैफिक भी घंटों तक रोका गया था। 14 अगस्त को डैम में बड़ा कट लगाकर पानी बहाया। जिम्मेदार अधिकारियों पर जांच बैठी। कंपनी ब्लैक लिस्टेड हुई। इसके बाद दोबारा टेंडर हुए।

बांध होता तो खूब पानी मिलता

कारम बांध से चार वर्ष पहले सिंचाई के लिए अधिकारियों ने कहा था। इसके लिए नहरें भी बना दी गई थीं। दो साल पहले बांध फूट गया, लेकिन अभी तक बांध नहीं बन पाया और सिंचाई भी नहीं हो पा रही है। -पवन सिंह, किसान, कोठीदा गांव

नवंबर से शुरू होगा निर्माण

नवम्बर से बांध का निर्माण शुरू हो जाएगा। निर्माण कार्य जून 2025 से पहले एजेंसी को पूरा करना है। जिन कमियों के चलते बांध टूटा था, उन कमियों को एजेंसी को ध्यान में रखते हुए बांध का निर्माण करना है। – शिरीष मिश्रा, ईएनसी, जल संसाधन विभाग मप्र

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