सड़क से आसमान तक! उड़ने वाली कार बनाने में कौन-कौन हुआ सफल, कहां अटकी तकनीक?

सड़क पर चलने वाली कार अगर अचानक हवा में उड़ने लगे, तो यह किसी फिल्म के दृश्य जैसा लगेगा। लेकिन उड़ने वाली कार का सपना नया नहीं है। पिछले 100 साल से भी ज्यादा समय से इंजीनियर और कंपनियां ऐसी तकनीक बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे एक ही वाहन सड़क पर भी चल सके और जरूरत पड़ने पर आसमान में भी उड़ सके। हाल ही में एलन मस्क की कंपनी टेस्ला के नए रोडस्टर के प्रदर्शन ने इस सपने को फिर चर्चा में ला दिया है। प्रदर्शन के दौरान कार जमीन से ऊपर उठती और हवा में स्टंट करती दिखाई दी। इस तकनीक को स्पेसएक्स के थ्रस्टर्स से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, टेस्ला ने आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि नहीं की है कि रोडस्टर आम कार की तरह लंबे समय तक हवा में उड़ सकेगी। कंपनी के मुताबिक, इसके उत्पादन की शुरुआत 2028 में हो सकती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या उड़ने वाली कार का सपना पहली बार एलन मस्क ने देखा है? ऐसा नहीं है। उनसे कई दशक पहले भी कई इंजीनियर इस दिशा में काम कर चुके हैं। आइए जानते हैं उड़ने वाली कार बनाने के कुछ चर्चित प्रयासों के बारे में।
ग्लेन कर्टिस का Curtiss Autoplane
उड़ने वाली कार के शुरुआती प्रयोगों में अमेरिकी विमान निर्माता ग्लेन कर्टिस का नाम प्रमुख है। उन्होंने 1917 में Curtiss Autoplane नाम का वाहन तैयार किया था। इसका ढांचा कार जैसा था और इसमें चार पहिए लगाए गए थे। इसमें पंख भी थे, जिन्हें जरूरत के अनुसार हटाया जा सकता था। इस वाहन ने कुछ छोटी छलांगें लगाईं, लेकिन यह पूरी तरह सफल उड़ान नहीं भर पाया। प्रथम विश्व युद्ध में अमेरिका के शामिल होने के बाद इसके विकास का काम भी रुक गया। इसके बावजूद इस प्रयोग ने दिखाया कि कार और विमान की तकनीक को एक साथ जोड़ने की कोशिश काफी पहले शुरू हो चुकी थी।
1937 में आया Arrowbile
ग्लेन कर्टिस के प्रयोग के करीब दो दशक बाद वाल्डो वाटरमैन ने 1937 में Arrowbile तैयार किया। यह उड़ने वाली कार बनाने की दिशा में एक और अहम प्रयास था। इस वाहन ने उड़ान भरने में सफलता हासिल की थी। हालांकि, इसे बाजार में बेचने और आम लोगों तक पहुंचाने में सफलता नहीं मिली। इससे एक बड़ी समस्या सामने आई। किसी वाहन का उड़ पाना ही काफी नहीं था, बल्कि उसे बनाना, बेचना और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए सुरक्षित बनाना भी जरूरी था।
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Taylor Aerocar ने दिखाई नई उम्मीद
1950 के दशक में Taylor Aerocar ने उड़ने वाली कार की उम्मीद को फिर मजबूत किया। इस वाहन को 1956 में अमेरिकी सरकार से प्रमाणन मिला था। इसे सामान्य कार की तरह सड़क पर चलाया जा सकता था और उड़ान भरने के लिए इसमें पंख लगाए जाते थे। यह प्रोजेक्ट तकनीकी रूप से काफी आगे बढ़ा, लेकिन इसका बड़े स्तर पर उत्पादन नहीं हो पाया। इसकी वजह लागत, सुरक्षा और आम लोगों के लिए इसे इस्तेमाल करना आसान बनाने जैसी चुनौतियां थीं।
AVE Mizar का प्रयोग हुआ दर्दनाक हादसे का शिकार
1970 के दशक में हेनरी स्मोलिंस्की ने AVE Mizar नाम की उड़ने वाली मशीन बनाने की कोशिश की। इसमें Ford Pinto कार को Cessna विमान के पंखों और दूसरे हिस्सों के साथ जोड़ा गया था। लेकिन सितंबर 1973 में परीक्षण उड़ान के दौरान यह वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में हेनरी स्मोलिंस्की और पायलट की मौत हो गई। इस घटना ने दिखाया कि कार और विमान की तकनीक को जोड़ने में सुरक्षा कितनी अहम है। केवल दोनों के हिस्सों को जोड़ देना एक भरोसेमंद उड़ने वाला वाहन बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है।
Paul Moller का Skycar प्रोजेक्ट
इसके बाद पॉल मोलर ने Skycar प्रोजेक्ट के जरिए उड़ने वाली कार का सपना आगे बढ़ाया। उनका लक्ष्य ऐसा वाहन बनाना था, जो हेलिकॉप्टर की तरह सीधे ऊपर उठ सके और उतर सके। इस तकनीक को वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग यानी VTOL कहा जाता है। इस प्रोजेक्ट पर कई वर्षों तक काम हुआ और इसके अलग-अलग मॉडल विकसित किए गए। हालांकि, यह तकनीक भी आम लोगों के लिए बड़े स्तर पर उपलब्ध होने वाली कार में नहीं बदल सकी।
उड़ने वाली कार बनाना आज भी बड़ी चुनौती
इन सभी प्रयोगों से पता चलता है कि उड़ने वाली कार का विचार नया नहीं है। कई इंजीनियरों ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए, लेकिन इसे आम लोगों के इस्तेमाल के लायक बनाना अब भी चुनौती है। उड़ने वाली कार को सड़क पर चलने के साथ हवा में संतुलन बनाए रखना होगा। इसके अलावा सुरक्षा, ईंधन या बैटरी, रखरखाव, लागत और हवाई यातायात के नियमों जैसी बातों का भी ध्यान रखना पड़ेगा। टेस्ला रोडस्टर के हालिया प्रदर्शन ने एक बार फिर लोगों की उत्सुकता बढ़ाई है। लेकिन जब तक कंपनी इसकी उड़ान क्षमता की आधिकारिक पुष्टि नहीं करती, तब तक इसे पूरी तरह उड़ने वाली कार मानना सही नहीं होगा। आने वाले वर्षों में नई तकनीक इस सपने को कितना करीब लाती है, यह देखना दिलचस्प होगा।




















