
लाजपत अग्रवाल-ग्वालियर। हाउसिंग बोर्ड की लापरवाही से थाटीपुर रीडेंसिफिकेशन योजना लापरवाही की भेंट चढ़ गई। यह योजना फेल हो गई। कोर्ट के निर्देश पर हाउसिंग बोर्ड ने 289 पेड़ शिफ्ट तो किए, लेकिन बाद में इनकी सुध नहीं ली। नतीजा यह हुआ कि अधिकतर पेड़ सूख गए। यही नहीं, इससे हरियाली के साथ कर्मचारियों के आवासों पर भी संकट खड़ा हो गया है। दरअसल, रिडेंसिफिकेशन योजना के तहत 2022 में हाउसिंग बोर्ड ने थाटीपुर कॉलोनी के सरकारी मकानों को तोड़कर उसे नए सिरे से विकसित करने की योजना बनाई थी।
इसमें 90 एकड़ में सिंधिया रियासत के समय बसाई गई इस कॉलोनी में सेकंड क्लास से फोर्थ क्लास तक के कर्मचारियों के सरकारी आवास शामिल थे, जिन्हें तोड़कर नया बनाया जाना था। यहां लगे पेड़ भी काट दिए गए। इसका समाजसेवी और स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों ने जमकर विरोध किया, लेकिन हाउसिंग बोर्ड अपने फैसले पर अडिग रहा तो इन पर्यावरण प्रेमियों ने हाईकोर्ट की शरण ली। उस समय हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि हरे-भरे पेड़ों को बचाया नहीं गया, तो नगर निगम, हाउसिंग बोर्ड सहित अन्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी लेकिन लापरवाही जारी है। समाजसेवी जल्द आंदोलन की तैयारी में हैं।
हाईकोर्ट के आदेश पर गिने गए थे छह हजार पेड़
हाईकोर्ट के आदेश पर थाटीपुर कॉलोनी में छह हजार पेड़ों की गिनती हुई थी। इन्हें बचाने के लिए कई समाजसेवी खड़े हुए और इन्हें बचाने के लिए दूसरी जगह पेड़ उगाने की योजना बनाई गई थी। हालांकि कोई योजना कारगर नहीं हो सकी।
हमने थाटीपुर कॉलोेनी में पेड़ों को बचाने के लिए पहल की थी। हम पेड़, दाना-पानी अभियान के तहत आंदोलन चला रहे हैं । -राज चड्ढा, समाजसेवी