
दुनिया की चुनिंदा धरोहरों के स्वर्णिम इतिहास और निर्माण को बचाए रखने के लिए विश्व धरोहर दिवस (World Heritage Day) मनाया जाता है। यह दिन समृद्ध विरासत के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए मनाया जाता है, ताकि लोग अपनी संस्कृति और परंपरा को करीब से समझ सकें। यूनेस्को हर साल लगभग 25 धरोहर को विश्व विरासत की लिस्ट में शामिल करता है, ताकि उन धरोहरों का संरक्षण किया जा सके।
विश्व धरोहर दिवस कब है?
विश्व धरोहर दिवस को विश्व विरासत दिवस भी कहते हैं। हर साल 18 अप्रैल को विश्व विरासत दिवस मनाया जाता है। शुरुआत में इस दिन को विश्व स्मारक दिवस के तौर पर मनाया जाता था। हालांकि, यूनेस्को ने इस दिन को विश्व विरासत दिवस या धरोहर दिवस के रूप में बदल दिया। इस साल यानी 2022 में ‘वर्ल्ड हैरिटेज डे’ की थीम विरासत और जलवायु है।
विश्व धरोहर दिवस का इतिहास
एक अंतरराष्ट्रीय संगठन ने 1968 में स्टॉकहोम में आयोजित होने वाले एक इंटरनेशनल समिट में दुनिया भर की मशहूर इमारतों और स्थलों की सुरक्षा का प्रस्ताव पेश किया था। इसे पारित किए जाने के बाद यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर की स्थापना की गई। उस समय 18 अप्रैल को विश्व स्मारक दिवस के तौर पर इस दिन को मनाने की शुरुआत हुई। उस दौरान विश्व में कुल 12 स्थलों को ही विश्व स्मारक स्थलों की सूची में शामिल किया गया था। इसके बाद 1982 में ‘इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ मोनुमेंट्स एंड साइट्स’ने इसे विश्व धरोहर दिवस का नाम दिया। यूनेस्को ने नवंबर 1983 में स्मारक दिवस को ‘विश्व विरासत दिवस’ के तौर पर मनाने की घोषणा की।
विश्व धरोहर दिवस का महत्व
हर देश का अपने अतीत और उस अतीत से जुड़ी कई सारी गौरव गाथा है। पुरानी इमारतें और स्थल समय के साथ जर्जर भले हो जाते हो लेकिन वह अलग-अलग इतिहासों के गवाह होते हैं। पुरानी जगहों की दरों दीवारों के साथ तमाम किस्से जुड़े होते हैं, युद्ध, महापुरुष, हार-जीत, कला, संस्कृति तक सबूत के तौर पर यहां जिंदा रहते हैं, ऐसे में विश्व धरोहर दिवस के जरिए इन किस्सों पर जमीं धूल को हटाने की कोशिश की जाती है।
भारत की विश्व धरोहर
भारत की पहली विश्व धरोहर महाराष्ट्र में स्थित एलोरा की गुफाएं हैं। महाराष्ट्र में पांच यूनेस्को विश्व विरासत स्थल हैं। वर्तमान में भारत में 40 विश्व धरोहरे हैं। यूनेस्को ने जिन 40 विश्व धरोहरों को घोषित किया है, उसमें सात प्राकृतिक, 32 सांस्कृतिक और एक मिश्रित स्थल है। भारत का 39 वां और 40 वां क्रमश: कालेश्वर मंदिर तेलंगाना और हड़प्पा सभ्यता का शहर धोलावीरा है।
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