सिवनी में बहनों ने भाई की अर्थी को दिया कंधा, बड़ी बहन ने दी मुखाग्नि
भाई की अर्थी उठी तो बहनें आगे-आगे चल पड़ीं। आंखों में आंसू थे, दिल में भाई को खोने का असहनीय दर्द, लेकिन कदमों में हिम्मत थी। जिस भाई की कलाई पर कभी राखी बांधी होगी, जिस भाई के साथ जिंदगी की न जाने कितनी यादें जुड़ी होंगी, उसी भाई को अंतिम विदाई देने की घड़ी आई तो बहनों ने खुद को संभाला और उसके अंतिम सफर की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली।
Sanjay Tiwari
17 Oct 2026

























