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RSS को अनपढ़ कहकर घिरे कुमार विश्वास, सफाई देते हुए कही ये बात

उज्जैन। मशहूर कवि कुमार विश्वास ने एक वीडियो जारी कर अपने उस मामले पर सफाई दी है, जिस पर उन्हें घेरा जा रहा है। दरअसल, उज्जैन में कालिदास अकादमी परिसर में विक्रमोत्सव के तहत आयोजित राम कथा के दौरान कुमार विश्वास ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS को अनपढ़ और वामपंथियों को कुपढ़ कह दिया। इस दौरान वहां पर प्रदेश सरकार के मंत्री मोहन यादव, सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक पारस जैन सहित महापौर मुकेश टटवाल मौजूद थे। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। अब कुमार विश्वास ने RSS को अनपढ़ कहने वाली टिप्पणी पर माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि मैंने अपने कार्यालय के एक व्यक्ति के संदर्भ में यह बात कही थी। इसे अन्य संदर्भ में न लें।

कुमार विश्वास ने क्या कहा ?

वायरल वीडियो में कुमार विश्वास ने कहा कि आज से चार साल पहले एक बजट आने वाला था। मैं अपने घर के स्टूडियो पर खड़ा था और कुछ रिकॉर्डिंग कर रहा था। एक बच्चे ने मोबाइल ऑन कर दिया। वो बच्चा हमारे साथ काम करता था। वो आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ) से जुड़ा हुआ करता था। मुझसे बोला भैया बजट आ रहा है। कैसा आना चाहिए ? मैंने कहा तुमने तो राम राज्य की सरकार बनाई है तो फिर राम राज्य जैसा बजट आना चाहिए। उस लड़के ने पूछा कि भैया, राम राज्य में कहां बजट होता था ?

मैंने कहा, समस्या तुम्हारी यही है कि वामपंथी तो कुपढ़ हैं और तुम अनपढ़ हो। इस देश में दो ही लोगों का झगड़ा चल रहा है। एक वामपंथी हैं, वो कुपढ़ हैं, उन्होंने पढ़ा सब है, लेकिन सब गलत पढ़ा है। और एक ये लोग हैं जिन्होंने पढ़ा ही नहीं और कहते ऐसे हैं जैसे ये ज्ञाता हों। ये ऐसे बोलते हैं कि हमारे वेदों में लिखा है कि जबकि कभी वेदों को देखा तक नहीं होगा।

रामराज्य में कहां बजट होता था, तो सुन लो…

कुमार विश्वास ने कहा कि जो लोग बोल रहे थे रामराज्य में कहां बजट होता था, तो सुन लो… भगवान राम जब वनवास के दौरान चित्रकूट पहुंचे तो उनसे मिलने भरत पहुंचे। राम ने भरत को रात में बैठकर समझाया। कुमार ने आगे कहा कि भगवान ने भरत से पूछा कि बेटा टेक्स्ट कैसे ले रहे हो पैसा-वैसा ठीक-ठाक आ रहा है। भरत ने कहा- हां, भैया से टैक्स लेते हैं वैसे ले रहा हूं।

कुमार विश्वास ने आगे कहा कि अब देखिए टैक्सेशन, यहां के वित्त मंत्री भी देखें और निर्मला सीतारमण भी सुनें। इससे फायदा होगा देश का और उनका स्वयं का। सूरज समुद्र से पानी ले लेता है, समुद्र को पता नहीं चलता। नदी से पानी ले लेता है, नदी को पता नहीं चलता। गिलास से पानी ले लेता है, गिलास को पता नहीं चलता। अंजूरी में पानी लेकर जून के महीने में बाहर खड़े हो जाओ पांच मिनट में पानी खत्म हो जाता है। पानी कौन ले गया, सूरज। और इस पानी का क्या बनाता है, बादल। ये बादल इक्ट्ठा होकर कहां बरसते हैं, जहां पानी की आवश्यकता होती है। यानि कि राजा जब कर ले, टैक्स ले तो किसी को पता न चले कि टैक्स कट गया।

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