
भोपाल। मध्य प्रदेश में इन दिनों गर्मी कहर बरपा रही है। चिलचिलाती धूप और लगातार तापमान बढ़ने की वजह से लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो रहा है। दतिया प्रदेश में सबसे गर्म स्थान रहा, जहां पारा 47.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। ये इस सीजन का सबसे अधिकतम तापमान है। शनिवार को भी यहां का टेम्प्रेचर 47.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
वहीं भोपाल, इंदौर और उज्जैन सीजन के सबसे गर्म रहे। भोपाल में 43 डिग्री, इंदौर में 43.1 डिग्री और उज्जैन में पारा 44 डिग्री रहा। जबलपुर में तापमान 41 डिग्री दर्ज किया गया। प्रदेश में कई जगहों पर लोग भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों से बेहाल नजर आए।
प्रदेश बड़े शहरों का तामपान
शहर | अधिकतम तापमान |
ग्वालियर | 45.5 डिग्री |
उज्जैन | 44 डिग्री |
भोपाल | 43 डिग्री |
इंदौर | 43.1 डिग्री |
जबलपुर | 41 डिग्री |
कहां कितना रहा तापमान
मध्य प्रदेश के दतिया में रविवार को अधिकतम तापमान 47.5 डिग्री सेल्सियस, गुना में 45.5 डिग्री सेल्सियस, ग्वालियर में अधिकतम तापमान 45.5 डिग्री, नौगांव में 45.3 डिग्री सेल्सियस, खजुराहो में 44.8 डिग्री, धार में 44.4 डिग्री, रतलाम में 44.2 डिग्री, उज्जैन में 44 डिग्री, टीकमगढ़ में 44 डिग्री, सागर में 43.4 डिग्री, इंदौर में 43.1 डिग्री, खंडवा में 43.1 डिग्री, भोपाल में 43 डिग्री रहा। जबलपुर में तापमान 41 डिग्री दर्ज किया गया।
वेस्टर्न डिस्टरबेंस ट्रफ लाइन के साथ एक्टिव
मध्य प्रदेश मौसम विभाग के अनुसार, नॉर्थ-ईस्ट राजस्थान के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम है। वहां से एक ट्रफ लाइन भी गुजर रही है। मध्य प्रदेश में वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) ट्रफ लाइन के साथ एक्टिव है। वहीं एक और वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर होगा। इसके चलते कहीं तेज गर्मी है तो कहीं बारिश-आंधी है। खासकर दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में बारिश-आंधी हो रही है। उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में टेम्प्रेचर बढ़ रहा है। शनिवार को भी तेज गर्मी रही।
गर्मी में क्यों बढ़ता है स्ट्रोक का खतरा?
जेपी अस्पताल के सविल सर्जन डॉ. राकेश श्रीवास्तव के अनुसार गर्मी बढ़ने के कारण शरीर खुद को ठंडा ठीक से नहीं कर पाता है। इसके कारण रक्त पतला होने लगता है। इसे हाइपरकोएगुएबल स्टेट कहते हैं। गर्मी ज्यादा बढ़ने के कारण ब्लड क्लॉट होने का खतरा बढ़ जाता है। जिसके कारण स्ट्रोक का जोखिम बढ़ता है। इसलिए गर्मी में जरूरी है कि खुद को हाइड्रेट रखें। इसके साथ ही हीट स्ट्रोक में तेज गर्मी व लू की चपेट में आने से शरीर का तापमान बढ़ जाता है। जिसके चलते शरीर का नेचुरल कुलिंग सिस्टम हैंग हो जाता है, यानी काम नहीं करता है। ऐसे में सही उपाय अपनाने जरूरी हैं। यह स्थिति कई बार मौत का कारण भी बन जाती है।
हीट स्ट्रोक की स्थिति में ऐसे करें बचाव
सीएमएचओ डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि हीट स्ट्रोक जानलेवा हो सकता है। तापघात की स्थिति में मरीज शॉक में चला जाता है। लू लगने की स्थिति में सबसे पहले मरीज को पानी पिलाकर शरीर के तापमान को कम करने के उपाय किए जाने चाहिए। सामान्य तापमान के पानी में कपड़े को भिगों कर शरीर पर मलना चाहिए। शरीर में पानी की कमी न हो इसका विशेष ध्यान रखें। साथी ही जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जाए।