
सीहोर जेल में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक खास पहल की शुरुआत की गई है। प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष, सतीश चंद्र शर्मा के निर्देशन में यह कार्यक्रम चल रहा है। इस पहल में बैंक ऑफ इंडिया लीड बैंक और ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान का भी सहयोग प्राप्त है। इसका मुख्य उद्देश्य जेल में बंद कैदियों को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षित करना है ताकि वे जेल से बाहर आने के बाद अपने पैरों पर खड़े हो सकें।
बंदियों को 10 दिन का व्यवसायिक प्रशिक्षण
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव, स्वप्नश्री सिंह के अनुसार, चयनित बंदियों को 10 दिन का व्यवसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा। इस प्रशिक्षण में बंदी अगरबत्ती, साबुन, सर्फ और फिनाइल बनाने जैसी कई स्वरोजगार संबंधी गतिविधियों में निपुण हो रहे हैं। यह प्रयास इस उद्देश्य से किया जा रहा है कि बंदी जेल से रिहा होने के बाद खुद को आर्थिक रूप से स्थिर कर सकें और अपने जीवन को एक नई दिशा दे सकें।
अपराध में कमी की उम्मीद
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का एक बड़ा उद्देश्य यह है कि बंदी जेल से बाहर आने के बाद अपराध की ओर न बढ़ें और समाज में एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाएं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का लक्ष्य है कि इस पहल से बंदी अपने आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ें और किसी भी प्रकार की असामाजिक गतिविधियों में लिप्त होने की संभावना को कम किया जा सके।
अधिकारियों ने की पहल की सराहना
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का निरीक्षण विशेष न्यायाधीश हेमंत जोशी, द्वितीय जिला न्यायाधीश एमके वर्मा और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विनीता गुप्ता ने किया। इस दौरान जिला विधिक सहायता अधिकारी जीशान खान, जेल उप अधीक्षक ज्योति तिवारी और लीड बैंक मैनेजर अरुण कुमार शर्मा भी उपस्थित थे। सभी अधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम बंदियों के सुधार और उन्हें समाज में एक सकारात्मक स्थान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।