
हर्षित चौरसिया-जबलपुर। प्रदेश में डॉग बाइट की तरह अब कैट बाइट के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। प्रदेश में हर दिन औसतन 54 लोगों को बिल्लियां काटकर घायल कर रही हैं। मप्र में पिछले वित्त वर्ष करीब 10 हजार लोग कैट बाइट के शिकार हुए थे और अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक इन केसों की संख्या करीब 20 हजार रही, यानि बिल्लियों के काटने के मामले दोगुने हो गए हैं। कैट बाइट के मामले में वर्ष अप्रैल 23- मार्च 24 में चार जिलों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर व जबलपुर में से भोपाल में सबसे ज्यादा कैट बाइट के केस दर्ज किए गए हैं।
जबकि, गत वर्ष जबलपुर पहले पायदान पर था। वेटरनरी कॉलेज के प्रोफेसर एंड हेड मेडिसिन विभाग प्रो. डॉ. देवेन्द्र गुप्ता ने बताया कि डॉग लवर्स की तरह अब बिल्लियों को पालने का शौक लोगों में पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा है। कैट के नाखून की खरोंच से भी बीमार होने का खतरा होता है। यदि टीकाकरण नहीं हुआ है तो बिल्ली के लार में रैबीज वायरस होने की आशंका ज्यादा होती है। टीकाकरण होने पर इसकी संभावना बहुत कम होती है।
इसलिए काटती हैं बिल्लियां
पशु चिकित्सकों का कहना है कि बिल्लियां जन्मजात शिकारी होती हैं, लेकिन जब तक उन्हें कोई खतरा नहीं होता वे काटती नहीं है। कई बार पालक द्वारा खेल के दौरान बिल्ली को ऐसा महसूस होता है कि उस पर अटैक हो रहा है, जिस पर वे आक्रामक होकर हमला कर देती है। इसमें बिल्ली नाखून मारने के साथ दांतों से काट भी लेती है।
आम तौर पर लोगों में धारणा है कि बिल्ली के काटने से रैबीज नहीं हो सकता है। कुछ केस में एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं लगाने के कारण वे रैबीज के शिकार हो जाते हैं। इसमें मृत्यु दर 100 प्रतिशत है। कैट बाइट होने पर एंटी रैबीज वैक्सीन लगवानी चाहिए इसमें लापरवाही से डॉग बाइट की तरह की लक्षण देखने को मिलते हैं। – डॉ. आदित्य परिहार (एमडी मेडिसिन)
एनिमल बाइट के मामलों में पीड़ितों को समय पर एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाना चाहिए। प्रदेश के सभी स्वास्थ्य केंद्रों यह उपलब्ध है। – डॉ. नमिता नीलकंठ, उपसंचालक, स्वास्थ्य रैबीज प्रोग्राम एनएचएम
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