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नियम 3 साल का, पंचायत के अफसर 10-10 साल से एक ही जगह पर जमे

आलम ये... एक ही जिले में बदल-बदल कर ब्लॉक में पदस्थ हो रहे हैं

पुष्पेंद्र सिंह, भोपाल। राज्य शासन के नियम हैं कि क्लास वन और सेकंड क्लास के अफसर गृह जिले में पदस्थ नहीं होंगे, न ही एक जिले में तीन साल से अधिक समय तक रहेंगे। इसके अलावा मुख्यालय से भी एक अवधि के बाद स्थानांतरण हो सकेंगे। लेकिन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में दर्जनों अफसर ऐसे नियमों के बाहर हैं। जनपद पंचायतों में आलम है कि अधिकारी एक ही जिले में बदल-बदल कर ब्लॉक में पदस्थ हो रहे हैं।

इससे चुनाव पर सवाल उठ रहे हैं। प्रदेश में लोकसभा चुनाव के पहले निर्वाचन आयोग ने विभागों को निर्देश दिए थे कि एक स्थान पद पदस्थ अधिकारियों को बदला जाए। बावजूद पंचायत विभाग के कई अफसर नहीं हटाए गए। ये अधिकारी सहायक परियोजना अधिकारी, विकासखंड अधिकारी, परियोजना अधिकारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, उपायुक्त और संयुक्त आयुक्त स्तर के हैं।

कुछ उदाहरणोें से समझिए व्यवस्था की बानगी

  • राजेश पटैरिया सागर जिले में परियोजना अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं। ये जिले के सभी 11 जनपदों में सीईओ के पद पर फेरी लगा रहे हैं। ये बीना, केसली, रेहली, सागर, राहतगढ़, देवरी, खुरई जनपदों में सीईओ पदस्थ रह चुके हैं। सागर इनका गृह जिला है।
  • प्रतिष्ठा जैन सीईओ हैं, सागर जिपं में परियोजना अधिकारी के पद पर पदस्थ रहीं। अब केसली जनपद सीईओ हैं। बंडा, शाहगढ़ में भी पदस्थ थीं।
  • धनंजय मिश्रा आठ साल से परियोजना अधिकारी के पद पर दतिया में पदस्थ हैं। बताया जाता है कि उनके तबादले तो कई बार हुए लेकिन निरस्त हो गए। वे कभी भांडेर और दतिया में सीईओ रहे तो कभी जिपं में एसीओ तथा पीओ बना दिए गए पर जिला नहीं छूटा।
  • पंकज जैन का पद उपायुक्त है। विदिशा जिले में कई साल से पदस्थ हैं। कुरवाई जनपद के दो बार सीईओ रहे, जिपं में एसीईओ बना दिया गया। सवाल उठ रहे हैं कि जब पद उपायुक्त का है तो जनपद सीईओ क्यों बनाया जा रहा।
  • वृंदावन मीना का पद उपायुक्त का है। यह जनपद पंचायत उदयपुरा, औबेदुल्लागंज और गैरतगंज के सीईओ पदस्थ रहे। अब जिला पंचायत में एसीईओ हैं। इनका जिला नहीं छूटा।
  • सचिन गुप्ता वर्तमान में मालथौन के जनपद सीईओ हैं। इसके पहले रहली और शाहगढ़ में तीन-तीन बार पदस्थ रह चुके हैं।

मुख्यालय के हाल:

यहां पर भी नहीं बदलीं शाखाएं इधर, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत विकास कार्यालय, मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन, पंचायत राज और ग्रामीण सड़क में कई अधिकारी सालों से पदस्थ हैं। इनकी शाखाओं का प्रभार भी नहीं बदला गया है।

एसीएस बोले- नो कमेंट

इस बारे में पंचायत एवं ग्रामीण विकास के एसीएस मलय श्रीवास्तव का कहना है कि वे इस समय बाहर हैं और इस बारे में कोई कमेंट नहीं देना चाहते हैं।

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