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प्राइवेट हॉस्पिटल में ज्यादा बिल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दी चेतावनी, कहा- चार्जेज का एक स्टैंडर्ड फिक्स करो, वरना...

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प्राइवेट हॉस्पिटल में ज्यादा बिल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दी चेतावनी, कहा- चार्जेज का एक स्टैंडर्ड फिक्स करो, वरना...
नई दिल्ली। प्राइवेट हॉस्पिटल में फीस और अन्य चार्जेज इतने बढ़ गए हैं कि आम आदमी के लिए इलाज कराना मुश्किल हो गया है। एक बार हॉस्पिटल में एडमिट होने का मतलब जीवन की आधी से ज्यादा पूंजी मेडिकल बिल में ही खर्च होना। इसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सख्त आदेश दिए हैं कि, सभी राज्यों में हॉस्पिटल्स के लिए एक स्टैंडर्ड चार्ज फिक्स किए जाएं। प्राइवेट हॉस्पिटल की मनमानी फीस वसूली नहीं चलेगी। अगर केंद्र सरकार समाधान खोजने में नाकाम होती है तो सुप्रीम कोर्ट के पास उसका भी सॉल्यूशन है।

मोतियाबिंद तक के ऑपरेशन के चार्ज 10 हजार से एक लाख तक

नॉन गवर्नमेंट ऑर्गेनाइजेशन (NGO) ‘वेटरन फोरम फॉर ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक लाइफ’की ओर से दायर की गई याचिका में हॉस्पिटल में मेडिकल चार्ज के अलग-अलग मानकों को लेकर सवाल उठाए गए थे। दायर याचिका में बताया गया था कि, अलग-अलग हॉस्पिटल्स में मोतियाबिंद तक के इलाज के लिए 30 हजार रुपए से लेकर एक लाख रुपए तक की फीस ली जा रही है। जबकि सरकारी हॉस्पिटल्स में इसके ऑपरेशन केवल 10 हजार में आसानी से हो जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया केंद्र को एक महीने का समय

सुप्रीम कोर्ट ने महीने भर के भीतर इस बारे में नोटिफिकेशन जारी करने का निर्देश केंद्र को दिया है। कोर्ट ने अपने स्टेटमेंट में कहा, 'अगर केंद्र सरकार समाधान खोजने में नाकाम होती है तो हम CGHS के हिसाब से स्टैंडर्ड रेट तय करने की याचिकाकर्ता की गुहार पर विचार करेंगे।'

14 साल पुराना कानून होगा लागू

कोर्ट ने आगे कहा कि, 14 साल पुराने कानून - क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट रूल्स (Clinical Establishment Rules) को लागू करने को कहा है। इसे लागू करने के बाद से राज्यों से बातचीत कर महानगरों, शहरों और कस्बों में इलाज और विभिन्न तरह के ऑपरेशनों के स्टैंडर्ड रेट तय करना अनिवार्य हो जाएगा।

SC के बार-बार बोलने पर नहीं लिया राज्यों ने कोई एक्शन

बता दें कि मामले को जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सुना। SC ने राज्यों को फटकार लगाते हुए आगे कहा कि, उसने इस बारे में राज्यों को बार-बार लिखा लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। स्वास्थ्य सेवा नागरिकों का मूल अधिकार है, केंद्र इस आधार पर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।

सभी प्रकार के इलाज और सर्जरी के रेट डिस्प्ले करें हॉस्पिटल

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा कि, देशभर के सभी हॉस्पिटल को निर्देश दिया जाए कि सभी प्रकार के इलाज और सर्जरी के फिक्स रेट को वह डिस्प्ले पर लगाएं, ताकि मरीजों को इसकी जानकारी हो। हॉस्पिटल स्टैंडर्ड चार्ज तय कर ले नहीं तो कोर्ट की तरफ से सभी हॉस्पिटल्स में एक समान फिक्स सरकारी चार्जेज तय करने की दिशा में विचार किया जाएगा। ये भी पढ़ें -ATS-NCB को मिली बड़ी सफलता : गुजरात के पोरबंदर में 3132 KG ड्रग्स जब्त, 5 विदेशी तस्कर भी गिरफ्तार
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