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Aadhaar Card पर SC का बड़ा फैसला : यह आपकी उम्र का पक्का सर्टिफिकेट नहीं... हाईकोर्ट के आदेश को किया खारिज

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Aadhaar Card पर SC का बड़ा फैसला : यह आपकी उम्र का पक्का सर्टिफिकेट नहीं... हाईकोर्ट के आदेश को किया खारिज
नई दिल्ली। आज के समय में आधार कार्ड का उपयोग हर जरूरी कामों में अनिवार्य हो गया है। चाहे वह सिम कार्ड खरीदना हो या बैंक में खाता खुलवाना हो। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि आधार कार्ड को केवल पहचान पत्र के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, न कि जन्म तिथि प्रमाणित करने के लिए। कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की उम्र का निर्धारण आधार कार्ड पर दर्ज जन्म तिथि से नहीं किया जा सकता। यह निर्णय एक सड़क दुर्घटना में मुआवजे से जुड़े मामले में सुनाया गया।

स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट से तय होगी उम्र

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने फैसला देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति की उम्र का निर्धारण स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (SLC) में दर्ज जन्म तिथि के आधार पर किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने भी स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड का उपयोग केवल पहचान साबित करने के लिए किया जा सकता है, लेकिन यह जन्म तिथि प्रमाणित करने वाला वैध दस्तावेज नहीं है।

मुआवजे का मामला पहुंचा था सुप्रीम कोर्ट

यह मामला पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सड़क दुर्घटना में मृत व्यक्ति के परिजनों ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में मुआवजे की मांग की थी। MACT ने स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट में दर्ज जन्म तिथि के आधार पर मृतक की उम्र 45 साल मानी और 19.35 लाख रुपए मुआवजे का आदेश दिया था। बीमा कंपनी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट ने स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट की जगह आधार कार्ड पर लिखी जन्म तिथि को सही मानते हुए मुआवजे की राशि घटाकर 9.22 लाख रुपए कर दी। आधार के अनुसार मृतक की उम्र 47 वर्ष मानी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का फैसला पलटा

मृतक के परिजनों ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि उम्र का निर्धारण स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट में दर्ज तिथि के आधार पर ही किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने MACT के फैसले को बहाल करते हुए 19.35 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया। ये भी पढ़ें- जस्टिन ट्रूडो ने लागू की नई वीजा पॉलिसी : कनाडा को होगा अरबों डॉलर का नुकसान, भारतीय छात्र भी होंगे प्रभावित
People's Reporter
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