
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और फसलों के अपशिष्ट को जलाने से रोकने में असफल होने पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को शुक्रवार को फटकार लगाई। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस अगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि वायु गुणवत्ता समिति को और सक्रिय रूप से कार्य करने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि आयोग को यह सुनिश्चित करने की कोशिश करनी चाहिए कि पराली जलाने के वैकल्पिक उपकरणों का इस्तेमाल जमीनी स्तर पर हो।
शीर्ष अदालत ने इसी के साथ प्रदूषण को नियंत्रित करने और पराली जलाने से रोकने के लिए उठाए गए कदमों को लेकर आयोग को बेहतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन पहले ही सीएक्यूएम से डेटा मांगा था।
क्या समितियों का गठन किया ?
बेंच ने आयोग से कहा कि अधिनियम का पूरी तरह से गैर-अनुपालन हुआ है। बेंच ने कहा कि क्या समितियों का गठन किया गया है? उठाए गए एक भी कदम को दिखाएं, आपने अधिनियम के तहत किन निर्देशों का उपयोग किया है? बस हलफनामा देखें। हमें धारा 12 और अन्य के तहत जारी एक भी निर्देश दिखाएं। बेंच ने कहा कि यह सब हवा में है। कोर्ट ने आयोग से पूछा कि हर साल पराली जलाई जाती है। क्या इसमें कोई कमी आई है? आप पराली जलाने के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं? लगातार बैठकें कहां हो रही हैं?
आप मूक दर्शक बने हुए हैं : कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सीएक्यूएम के अध्यक्ष से पूछा कि आयोग 3 महीने में एक बार क्यों मीटिंग करता है। बेंच ने आयोग से कहा कि सब कुछ कागज पर है, आप मूक दर्शक हैं। जब अदालत ने पराली जलाने की समस्या का उल्लेख किया, तो सीएक्यूएम ने कहा, “आग की घटनाओं में भारी कमी आई है।” कोर्ट ने कहा कि सीएक्यूएम अधिनियम की धारा 14 के तहत कोई कार्रवाई की गई? इसमें अधिनियम, नियम, आदेश या निर्देश के प्रावधानों के उल्लंघन के लिए जुर्माना लगाना शामिल हैं। हमें ऐसा नहीं लगता।
CAQM ने अपने जवाब में दिए ये तर्क
सीएक्यूएम ने अपने जवाब में कहा कि हमने समिति बनाने के बाद से 82 कानूनी आदेश और 15 सुझाव जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम खतरनाक और बड़े घटनाक्रम के मुहाने पर हैं। सुरक्षा और प्रवर्तन के लिए समितियों ने क्या कदम उठाए हैं? CAQM चेयरमैन राजेश वर्मा ने कहा कि हमारी टीम ने 19,000 जगहों पर निरीक्षण किए हैं। हमने 10,000 से अधिक फैक्ट्रियों को बंद करने का आदेश दिया है। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या इस समस्या के बारे में कुछ किया गया है जिसका हम हर दिन सामना करते हैं?