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श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद : मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज, इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला- एक साथ सुनी जाएंगी हिंदू पक्ष की सभी याचिकाएं

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श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद : मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज, इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला- एक साथ सुनी जाएंगी हिंदू पक्ष की सभी याचिकाएं
प्रयागराज/मथुरा। मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी। मुस्लिम पक्ष की दलील को कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया है। वहीं मामले में दायर 18 याचिकाएं एक साथ सुनी जाएंगी। जस्टिस मयंक कुमार जैन की सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाया। इससे पहले 6 जून को सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। हिंदू पक्ष की तरफ से दाखिल 18 याचिकाओं को शाही ईदगाह कमेटी के वकीलों ने हाईकोर्ट में ऑर्डर 7, रूल 11 के तहत चुनौती दी। मुस्लिम पक्ष ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़ी याचिकाओं की पोषणीयता को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मुस्लिम पक्ष ने दलील दी थी कि समझौता 1968 का है। 60 साल बाद समझौते को गलत बताना ठीक नहीं। इन याचिकाओं को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके साथ ही  हिंदू पक्ष की सिविल वाद की पोषणीयता वाली याचिकाएं मंजूर कर ली। हिंदू पक्ष का दावा है कि शाही ईदगाह का ढाई एकड़ का एरिया कोई मस्जिद नहीं, वह भगवान कृष्ण का गर्भगृह है।

हिंदू पक्षकारों के तर्क

  • ढाई एकड़ में बना शाही ईदगाह कोई मस्जिद नहीं है।
  • ईदगाह में केवल साल भर में 2 बार नमाज पढ़ी जाती है।
  • ईदगाह का पूरा ढाई एकड़ एरिया भगवान कृष्ण का गर्भगृह है।
  • शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी के पास भूमि का कोई ऐसा रिकॉर्ड नहीं है।
  • सियासी षड्यंत्र के तहत मंदिर तोड़कर ईदगाह का अवैध निर्माण कराया गया था।
  • सीपीसी के आदेश-7, नियम-11 इस याचिका में लागू नहीं होता है।
  • जमीन का स्वामित्व कटरा केशव देव का है।
  • वक्फ बोर्ड ने बिना किसी वैध प्रक्रिया के इसे वक्फ संपत्ति घोषित कर दी।
  • भवन पुरातत्व विभाग से संरक्षित घोषित है।
  • ASI ने नजूल भूमि माना है, इसे वक्फ संपत्ति नहीं कह सकते।

मुस्लिम पक्षकारों की दलीलें

  • इस जमीन पर दोनों पक्षों के बीच 1968 में समझौता हुआ है। 60 साल बाद समझौते को गलत बताना ठीक नहीं है। मुकदमा सुनवाई लायक नहीं।
  • उपासना स्थल कानून यानी प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 के तहत भी मुकदमा आगे ले जाने के काबिल नहीं है।
  • 15 अगस्त, 1947 के दिन जिस धार्मिक स्थल की पहचान और प्रकृति जैसी है वैसी ही बनी रहेगी। यानी उसकी प्रकृति नहीं बदली जा सकती है।
  • इस मामले को लिमिटेशन एक्ट, वक्फ अधिनियम के तहत देखा जाए।
  • यह सिविल कोर्ट में सुना जाने वाला मामला नहीं, वक्फ ट्रिब्युनल में सुनवाई हो।

क्या है विवाद ?

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर और शाही ईदगाह मस्जिद का यह पूरा विवाद 13.37 एकड़ जमीन पर मालिकाना हक को लेकर है। इस जमीन के 11 एकड़ में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर है तो बाकी बचे 2.37 एकड़ में शाही ईदगाह मस्जिद बनी है। हिंदू पक्ष का दावा है कि पूरी जमीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर की है और पूरी जमीन उन्हें देने की मांग कर रहा है। वहीं मुस्लिम पक्ष इस दावे से इनकार कर रहा है। वहीं जानकार दावा करते हैं कि इस विवाद का इतिहास 350 साल पुराना है। साल 1670 में जब दिल्ली में मुगल शासक औरंगजेब का शासन था, उसी दौरान ठाकुर केशव देव मंदिर को तोड़कर उसके ऊपर शाही ईदगाह मस्जिद बनवाई गई थी। मस्जिद के निर्माण में मंदिर के ही अवशेषों का इस्तेमाल किया गया था। यही वजह है मस्जिद में सनातन धर्म के प्रतीक होने का दावा किया जा रहा है। ये भी पढ़ें- श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद : सर्वे की रोक पर सुप्रीम कोर्ट का इनकार, हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से किया मना
Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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