
मनीष दीक्षित-भोपाल। भाजपा के सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले मप्र के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान अब नरेंद्र मोदी सरकार 3.0 का हिस्सा बन चुके हैं। इसके साथ ही वे उन नेताओं की फेहरिस्त में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने मप्र के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी के बाद या पहले केंद्र सरकार में भी अहम भूमिका निभाई है। शिवराज से पहले 7 ऐसे नेता रहे, जो मप्र में मुख्यमंत्री भी रहे और केंद्र सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं। केंद्र सरकारें हमेशा से मध्यप्रदेश के नेताओं की काबिलियत का इस्तेमाल करती आई हैं। यही वजह है कि केंद्र की राजनीति में भी प्रदेश के नेताओं का दबदबा रहा है।
ये पहले सीएम बाद में केंद्र में मंत्री बने
1.अर्जुन सिंह : 1980 से 1985 तक मप्र के सीएम रहे। इसके बाद उन्होंने राजीव मंत्रिमंडल में वाणिज्य मंत्रालय, संचार मंत्रालय संभाला। 1988 में एक बार फिर मप्र के सीएम बने। इसके बाद वे पीवी नरसिंह राव और मनमोहन सिंह कैबिनेट में मानव संसाधन मंत्री रहे। अर्जुन सिंह मप्र के एकमात्र ऐसे नेता हैं, जो केंद्रीय मंत्री बनने के बाद दूसरी बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे।
2. मोतीलाल वोरा : 1985 और 1989 में दो बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने। इसके अलावा राजीव गांधी कैबिनेट में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ ही नागरिक उड्डयन मंत्रालय का काम संभाला। वोरा मूलरूप से राजस्थान के रहने वाले थे। बाद में उन्होंने अपनी कर्मस्थली छत्तीसगढ़ को बनाया। दिल्ली में रहने के साथ ही वे छत्तीसगढ़ से अंत तक जुड़े रहे।
3. सुंदरलाल पटवा : 1980 में 28 दिन मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद 1990 से 1992 तक दो वर्ष से अधिक समय तक एक बार फिर मुख्यमंत्री रहे। पटवा बाद में अटल बिहारी वाजपेई सरकार में मंत्री बने। उन्होंने ग्रामीण विकास, केमिकल एंड फर्टिलाइजर्स और खनिज मंत्रालय का काम संभाला।
4. प्रकाश चंद्र सेठी : मप्र के मालवा से आने वाले प्रकाश चंद्र सेठी जनवरी 1972 से दिसंबर 1975 तक लगातार दो बार मप्र के मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद उन्होंने इंदिरा गांधी की कैबिनेट में गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, वित्त मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी निभाई।
ये केंद्रीय मंत्री रहे, फिर मुख्यमंत्री बने
प्रदेश 19 मुख्यमंत्रियों में से तीन नेता ऐसे भी रहे, जिन्होंने अपना राजनीतिक सफर केंद्र की राजनीति से शुरू किया और बाद में प्रदेश की बागडोर संभाली। मप्र के इतिहास में तीन नेताओं के नाम मिलते हैं जिन्होंने केंद्रीय राजनीति में भी बड़ी जिम्मेदारी संभालने के बाद मप्र का रुख किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे कैलाश नाथ काटजू को केंद्र से मप्र की राजनीति के लिए भेजा गया था। उमा भारती और कमलनाथ के साथ भी ऐसा ही इत्तेफाक रहा । हालांकि उमा और नाथ मप्र में ज्यादा दिनों तक सीएम नहीं कर सके।
1. कैलाशनाथ काटजू : देश के प्रतिष्ठित वकील रहे। जवाहरलाल नेहरू मंत्रिमंडल में विधि, गृह और रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। जनवरी 1957 में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बनाए गए और 1962 तक इस पद पर रहे। नेहरू के आग्रह पर ही वे मध्यप्रदेश आये थे।
2. कमलनाथ : पीवी नरसिंह राव एवं मनमोहन सरकार में वन एवं पर्यावरण, कपड़ा मंत्रालय, वाणिज्य एवं उद्योग और सड़क परिवहन जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाली। दिसंबर 2018 में प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। हालांकि, यह सरकार 15 महीने ही चल सकी।
3. उमा भारती : अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रहीं। 2003 में मध्यप्रदेश की तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार को करारी शिकस्त देने के बाद सीएम बनीं। 2014 में मोदी सरकार आने के बाद वे एक बार फिर केंद्रीय मंत्री बनी और सितंबर 2017 तक केंद्रीय मंत्री रहीं।