सिवनी सीएमएचओ का अजब-गजब कारनामा, एमपीडब्ल्यू को सौंप दिया ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर का प्रभार

जबलपुर। स्वास्थ्य विभाग में नियम-कायदों का पालन कराने वाले जिम्मेदार अधिकारी ही यदि निर्धारित प्रक्रिया से हटकर आदेश जारी करें, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। ऐसे ही एक आदेश की चर्चा इन दिनों स्वास्थ्य महकमें में जमकर है। मामला है ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर (बीपीएम) की कुर्सी का। सिवनी जिले में स्वास्थ्य विभाग के मुखिया मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का संभालने का हवाला देते हुए 5 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी कर बरघाट सिविल अस्पताल में ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर (बीपीएम) का प्रभार एमपीडब्ल्यू जयपाल परते को दे दिया।प्रभारी बीपीएम पर एक एमपीडब्ल्यू को जिम्मेदारी देने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या विभाग में निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप प्रभार सौंपने के लिए उपयुक्त कर्मचारी उपलब्ध नहीं थे, या फिर नियमों की अनदेखी कर मनमाना निर्णय लिया गया?
कार्य की अधिकता बताकर बदला प्रभार
5 अक्टूबर के आदेश में वर्तमान प्रभारी योगिता साहू के पास कार्य की अधिकता और राष्ट्रीय कार्यक्रमों के सूचकांकों में अपेक्षित उपलब्धि नहीं मिलने का हवाला दिया गया है। लेकिन यदि उपलब्धियां कम थीं, तो क्या इसकी समीक्षा की गई? क्या जिम्मेदारी तय करने से पहले कारणों की जांच हुई? और क्या प्रभार बदलने के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाई गई? इन बिंदुओं पर आदेश में स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

क्या नियमों से ऊपर है अधिकारी का आदेश?
स्वास्थ्य विभाग में बीपीएम की जिम्मेदारी राष्ट्रीय कार्यक्रमों की निगरानी, लक्ष्यपूर्ति और प्रबंधन से जुड़ी होती है। ऐसे में महत्वपूर्ण पद का प्रभार किस आधार पर और किन नियमों के तहत सौंपा गया, यह सार्वजनिक जवाबदेही का विषय है। सीएमएचओ कार्यालय को बताना चाहिए कि एमपीडब्ल्यू जयपाल परते को प्रभारी बीपीएम बनाने का आधार क्या है और क्या इस नियुक्ति के लिए सक्षम स्तर से अनुमति ली गई है। अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर हैं। क्या वे इस आदेश की समीक्षा कर 2015 के दिशा-निर्देशों के पालन की स्थिति स्पष्ट करेंगे, या फिर नियमों से जुड़े सवालों को अनदेखा कर दिया जाएगा? बरघाट का यह मामला केवल प्रभार परिवर्तन का नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों के पालन का भी है।
क्या कहते हैं राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन 2015 के आदेश
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, भोपाल ने 3 जनवरी 2015 को जारी पत्र में विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक का पद रिक्त होने पर विकासखंड कम्युनिटी मोबिलाइजर को प्रभार सौंपने का निर्देश दिया था। कम्युनिटी मोबिलाइजर का पद रिक्त होने पर विकासखंड लेखा प्रबंधक को जिम्मेदारी देने की व्यवस्था बताई गई थी। दोनों पद रिक्त होने की स्थिति में भी अलग-अलग कर्मचारियों को प्रभार सौंपने के निर्देश थे। प्रभार देने की जिम्मेदारी जिला कार्यक्रम प्रबंधक की निर्धारित की गई थी। इसके बावजूद बरघाट में एमपीडब्ल्यू को बीपीएम का प्रभार सौंपे जाने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या 2015 के निर्देशों का पालन करना जरूरी नहीं?
कार्य में कमी को देखते हुए एमपीडब्ल्यू को मदद के लिए कहा है
इस बारे में सिवनी सीएमएचओ पंकज दुबे का कहना है कि बरघाट सिविल अस्पताल में पदस्थ बीसीएम के पास बीपीएम का प्रभार था, जो सिवनी से अपडाउन करती है। लगातार कार्य में कमी को देखते हुए एमपीडब्ल्यू को मदद के लिए कहा गया है, ताकि हम पुअर स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर कर सकें।




















