सीहोर: भाजपा की अंदरूनी कलह के बीच कांग्रेस का सियासी दांव, राजीव गुजराती ने घोषित की नई जिला टीम

सीहोर। जिले में भारतीय जनता पार्टी के भीतर कोसमी प्रकरण को लेकर उभरी असहजता और आपसी खींचतान के बीच मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अपनी नई जिला कार्यकारिणी घोषित कर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजीव गुजराती ने चारों विधानसभा क्षेत्रों सीहोर, आष्टा, इछावर और बुधनी के कार्यकर्ताओं को प्रतिनिधित्व देते हुए नई टीम का ऐलान किया है। एक ओर कोसमी में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला भाजपा के नेताओं के रुख को लेकर सवाल खड़े कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने संगठनात्मक नियुक्तियों के जरिए अपनी राजनीतिक सक्रियता दिखाने की कोशिश की है। अब इस नई कार्यकारिणी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पदाधिकारियों की सूची से आगे बढ़कर जमीन पर संगठन को सक्रिय करने और जनता के मुद्दों पर प्रभावी भूमिका निभाने की होगी।
कोसमी प्रकरण ने बढ़ाई भाजपा की अंदरूनी खींचतान पर चर्चा
भैरुंदा तहसील के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला जिले की राजनीति के केंद्र में बना हुआ है। विरोध में आदिवासी समाज की पदयात्रा और धरने के घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्रवाई के साथ राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका पर भी बहस छेड़ दी। इस मामले में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान के धरने पर बैठने के घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में विशेष ध्यान खींचा। इस दौरान भाजपा के कुछ नेताओं ने आदिवासी समाज के समर्थन में सक्रियता दिखाई, जबकि पार्टी के अन्य प्रमुख चेहरों की दूरी को लेकर चर्चाएं होती रहीं। इसी अंतर ने पार्टी के भीतर एकजुटता और नेतृत्व के रुख को लेकर सवालों को हवा दी। हालांकि, इन घटनाक्रमों के आधार पर पार्टी के भीतर किसी औपचारिक टकराव की पुष्टि नहीं की जा सकती, लेकिन राजनीतिक स्तर पर इसका असर साफ तौर पर चर्चा में है।
आश्वासन के बाद लौटी पदयात्रा, सियासी सवाल बरकरार
कोसमी प्रकरण में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच चर्चा तथा आश्वासन के बाद आदिवासी समाज की पदयात्रा समाप्त हुई और प्रदर्शनकारी वापस कोसमी लौटे। इससे तत्काल आंदोलन की स्थिति बदली, लेकिन आदिवासी परिवारों की समस्याओं और उनकी मांगों के समाधान को लेकर निगाहें अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। राजनीतिक दृष्टि से यह घटनाक्रम भाजपा के लिए संवेदनशील रहा है। वहीं कांग्रेस के लिए यह अवसर जनता से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाने का मौका भी बन सकता है। हालांकि, केवल कार्यकारिणी घोषित करने से विपक्षी दल को राजनीतिक लाभ मिलना तय नहीं है। इसके लिए कांग्रेस को कोसमी सहित जिले के जनहित से जुड़े मुद्दों पर निरंतर सक्रियता दिखानी होगी।
राजीव गुजराती ने घोषित की नई जिला कार्यकारिणी
इसी राजनीतिक माहौल के बीच कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजीव गुजराती ने जिला कांग्रेस कमेटी की नई कार्यकारिणी की घोषणा कर दी। यह गठन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और जिला प्रभारी जयश्री हरिकरण की अनुशंसा तथा सहमति से किया गया है। जिलाध्यक्ष ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि नई टीम अनुभव, ऊर्जा और समर्पण के साथ संगठन को मजबूत करेगी। पार्टी की ओर से जनता की समस्याओं के समाधान, जनहित के संघर्ष और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि घोषित टीम इन उद्देश्यों को किस तरह स्थानीय स्तर पर अमल में लाती है।
संगठन महासचिव विवेक राठौर, रमेश गुप्ता कोषाध्यक्ष नियुक्त
नई कार्यकारिणी में सीहोर नगर पालिका में नेता प्रतिपक्ष एवं पार्षद विवेक राठौर को संगठन महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं रमेश गुप्ता को जिला कांग्रेस कमेटी का कोषाध्यक्ष बनाया गया है। संगठन महासचिव का पद जिला स्तर पर समन्वय और गतिविधियों के संचालन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। उपाध्यक्ष पद पर कमल सिंह चौहान, राजेश यादव भूरा, जफर लाला, मदनलाल इटावदिया, सत्यनारायण भाटी, सुनील दुबे, अजय पटेल नंदगांव, संजीव अग्रवाल, रघुवीर सिंह दांगी और शोभाल सिंह ठाकुर को नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने विभिन्न नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी हैं। जिला कार्यकारिणी में महासचिव पद पर जितेंद्र शोभाखेड़ी, राजेन्द्र भरेवा, रामनारायण परमार, गीता देवी राठौर, ममता कीर, इदरीश मंसूरी, सुरेंद्र परमार, सुनील कटारा, राजकुमार तुलसी राठौर, उमाशंकर नागर, राजेन्द्र यादव, ओमाबाबा राठौर, देवीसिंह तंवर, जितेंद्र परिहार और विजेंद्र उइके को जिम्मेदारी दी गई है। सचिव पद पर भगवत पटेल, गोविंद सिंह सोलंकी, राजकुमार गौर, सतीश शर्मा, रूपसिंह केवट, प्रेम पटारिया, कमल सिंह वर्मा, सुरेश ठाकुर निवारिया, मुनव्वर खान मामू, दीप्ती कीर, विजेंद्र तिवारी, एहसान खान, मनु मुकेश गड़ोदिया, गीता कुशवाह, राजेन्द्र मेवाड़ा, इंदर सिंह पटेल, चंदरसिंह ठाकुर, अर्जुन सिंह अजय, संजय पाटीदार और उमाशंकर बंटी मीणा को शामिल किया गया है। इतनी बड़ी टीम के सामने अब जिम्मेदारियों का प्रभावी बंटवारा और नियमित संगठनात्मक गतिविधियां संचालित करने की चुनौती रहेगी।
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प्रवक्ता, सोशल मीडिया और वार रूम की कमान तय
पार्टी ने मीडिया और प्रचार संबंधी गतिविधियों के लिए पंकज शर्मा तथा देवेंद्र चौधरी को प्रवक्ता बनाया है। सोशल मीडिया की जिम्मेदारी अमित पटेल और पल्लव प्रगति को सौंपी गई है, जबकि जिला कार्यालय मंत्री का दायित्व भगत सिंह तोमर संभालेंगे। चुनावी तैयारियों के लिहाज से वार रूम की जिम्मेदारी प्रवीर परमार को प्रभारी और राहुल ठाकुर को सह प्रभारी के रूप में दी गई है। इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने मीडिया संवाद, डिजिटल प्रचार और चुनावी समन्वय के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां निर्धारित की हैं। इन व्यवस्थाओं की वास्तविक उपयोगिता आगामी राजनीतिक गतिविधियों और जनसंपर्क अभियानों के दौरान सामने आएगी।
निर्वाचन प्रबंधन के लिए भी बनाई टीम
जिला निर्वाचन प्रभारी के रूप में कृष्णकांत रिछारिया को नियुक्त किया गया है। विधानसभा निर्वाचन प्रभारी के तौर पर कमलेश चांडक, राजेश जाट, राकेश राठौर और रामचरण दवारिया को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अतिरिक्त कार्यकारिणी में 48 स्थायी आमंत्रित सदस्य और 47 विशेष आमंत्रित सदस्य भी शामिल किए गए हैं।
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अब संगठन की सक्रियता से तय होगी राजनीतिक ताकत
कांग्रेस की नई जिला कार्यकारिणी की घोषणा ऐसे समय हुई है, जब कोसमी प्रकरण ने जिले की राजनीति को गर्मा रखा है। भाजपा के भीतर नेताओं की अलग-अलग भूमिकाओं को लेकर जारी चर्चाओं के बीच कांग्रेस ने अपने संगठनात्मक ढांचे को सार्वजनिक कर राजनीतिक सक्रियता का संदेश दिया है। हालांकि, असली परीक्षा नियुक्तियों के बाद शुरू होगी। क्या नई टीम गांवों और कस्बों तक संगठन को सक्रिय कर पाएगी? क्या कांग्रेस स्थानीय समस्याओं पर लगातार आवाज उठाकर जनता का भरोसा मजबूत करेगी? और क्या चारों विधानसभा क्षेत्रों में घोषित प्रतिनिधित्व जमीनी स्तर पर एकजुटता में बदल सकेगा? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में संगठन की कार्यशैली और राजनीतिक सक्रियता से मिलेंगे। फिलहाल, राजीव गुजराती की नई टीम के गठन ने सीहोर के राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा को नया विषय दे दिया है।




















