
सीहोर से विकास शुक्ला।
कुबेरेश्वर धाम में अब उतनी भीड़ नहीं है, जितनी गुरुवार 16 फरवरी 2023 को थी। यहां सड़कों पर वाहन तो दिख रहे हैं, लेकिन जाम जैसी स्थिति बिल्कुल नहीं है। कथा में जाने वालों से ज्यादा भीड़ लौटने वालों की है। वजह! कल एक महिला की मौत के बाद से रुद्राक्ष वितरण के सभी काउंटर बंद कर दिए गए हैं।
सैकड़ों किलोमीटर दूर से यहां आए लोगों को जब तक रुद्राक्ष की उम्मीद थी, तब तक वे शांत थे। उम्मीद खत्म हुई तो अव्यवस्थाओं को लेकर गुस्सा बाहर आ गया। कुबेरेश्वर धाम जाने वाले रास्ते पर महाराष्ट्र के नासिक से आईं अनुसुइया गोले टैक्सी वाले पर नाराज हो रही हैं। कहती हैं- भोपाल से टैक्सी वाले ने मंदिर तक ले जाने का वादा किया था। लेकिन दो किलोमीटर पहले ही उतार दिया। अब पैदल जाना पड़ रहा है। उन्हें रुद्राक्ष न मिलने का कोई मलाल नहीं है, लेकिन अव्यवस्था पर नाराज हैं।

एक पक्की सड़क मंदिर तक जाती है, लेकिन यहां भीड़ और पुलिस अधिक है। भीड़ से बचने के लिए कुछ लोग खेतों की पगडंडियों से होते हुए पीछे के रास्ते से मंदिर तक पहुंच रहे हैं। इसी रास्ते पर महाराष्ट्र के नागपुर से आईं प्रियंका सचिन लोराकार मिलीं। कहती हैं कि अगर एक महीने महोत्सव चल रहा है तो पूरे समय रुद्राक्ष बांटना चाहिए था। हम लोग काफी तकलीफ उठाकर यहां पहुंचे थे कि रुद्राक्ष मिलेगा। लेकिन अब मायूस होकर लौट रहे हैं।

मंदिर के प्रवेश द्वार पर पुलिस कंट्रोल रूम है, जिसके अंदर चार-पांच पुलिस और महिला पुलिसकर्मी हैं। इनके पास वे लोग पहुंच रहे हैं, जो अपने परिवार, रिश्तेदार से बिछड़ गए हैं। यहां सूचना देने पर अनाउंस किया जा रहा है। मंदिर के गेट से अंदर की तरफ जाते ही विशाल शिवलिंग नजर आता है, जिसके चारों तरफ बेरीकेडिंग है। लोग इसे तीन तरफ से घेरकर पूजा कर रहे हैं और यहां से कंकर शिवलिंग के रूप में ले जा रहे हैं।

अंदर की तरफ बढ़ने पर पैर रखने की जगह नहीं है। जिसे, जहां जगह मिली, अपने साथ लाए बिस्तर, कपड़ों का टेंट बना लिया है। मानो उनके रुकने तक यही उनका घर है। कुछ लोग प्राथमिक उपचार काउंटर पर नजर आ रहे हैं, लेकिन यह सभी रुद्राक्ष की ही पूछताछ कर रहे हैं। इसी काउंटर पर खड़ीं एक महिला हमारे पास आती हैं और कहती हैं- यह किसी का मोबाइल फोन है जो शायद वह भूल गई हैं। उनका पर्स भी यहीं है, जिसमें पैसे भी हैं। मैंने फोन किया, लेकिन शायद भाषा नहीं समझ रहे। उन्होंने पर्स उन महिला तक पहुंचाने में हमारी मदद मांगी। हमने फोन पर बात कर उन्हें पर्स के बारे में जानकारी दी तो वह कुछ देर में फोन और पर्स ले गईं।

पूरे परिसर में जगह-जगह दान पात्र लगे हैं, लेकिन अलग से दान काउंटर भी है। यहां करीब 10 लोगों का स्टाफ काम कर रहा है। पीछे कथा का डोम बना है, जिसमें हजारों लोग शिवमहापुराण की कथा सुन रहे हैं। इस पंडाल के पास हमें खड़ा देख राजस्थान के भीलवाड़ा निवासी दिलीप सिंह राठौड़ और उनके दोस्त पहुंच गए। बोले- कल ही यहां आ गया था और अब तक रुद्राक्ष के लिए भटक रहा हूं। जब बाबाजी (पंडितप्रदीपमिश्रा) ने पूरे हिंदुस्तान को इनवाइट किया है तो भीड़ तो आएगी ही। लेकिन, रुद्राक्ष वितरण नहीं रोकना चाहिए था।

पंडाल के बाहर खड़े यूपी के मुजफ्फरपुर से आए एडवोकेट अमरदीप काकरान कहते हैं कि दिन भर से परेशान हूं। सेवादारों का व्यवहार इतना ‘अच्छा’ है कि दोबारा कोई शायद ही यहां आए। ऐसे कैसे आस्था रहेगी। उत्तर प्रदेश के नेमिषारण्य से आईं सुभाषिनी मिश्रा ने कहा कि 8 हजार रुपए खर्च कर आई हूं। रुद्राक्ष नहीं मिला। आने का कोई फल नहीं मिला।

कथा का पंडाल चारों तरफ से बेरीकेड्स से कवर है। पुलिस और धाम के सेवादार भी तैनात हैं। पंडाल के अंदर जितनी भीड़ है, उतने ही लोग आसपास छांव तलाशकर बैठे हैं। कुछ भोजन पंडाल के अंदर से कथा सुन रहे हैं और खाना भी खा रहे हैं। यहीं बाहर औरेया निवासी आरुषि गुप्ता मिलीं। उनका मोबाइल फोन चोरी हो गया है। कहती हैं- इधर से उधर घूम रही हूं। लेकिन, कोई मदद नहीं मिल रही। उन्होंने मोबाइल फोन देने वाले को 500 रुपए देने का अनाउंस भी किया।

अव्यवस्था पर नाराजगी, देखें वीडियो
कुबेरेश्वर धाम के अंदर भले ही शिवमहापुराण चल रही हो, लेकिन लाखों की भीड़ में हजारों कहानियां मिल रही हैं। किसी का मोबाइल फोन गुम गया है तो किसी के परिजन। आस्था और विश्वास के भरोसे लोग यहां पहुंच तो रहे हैं, लेकिन रुद्राक्ष न मिलने की निराशा उनके चेहरों पर झलक रही है। देखें रिपोर्ट