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सीहोर में रामलीला का शुभारंभ, मंचन के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंच रहे धर्म और मर्यादा के संदेश

सीहोर के कोलीपुरा स्थित नृसिंह लक्ष्मी मंदिर में रामलीला शुरू हुई। प्रयागराज के कलाकारों ने शिव विवाह, नारद मोह भंग और रावण जन्म की लीलाओं का मंचन किया।
सीहोर में रामलीला का शुभारंभ, मंचन के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंच रहे धर्म और मर्यादा के संदेश
शिव विवाह से रावण जन्म तक का भावपूर्ण मंचन, रामलीला से संस्कारों और भारतीय संस्कृति का संदेश

सीहोर। नवरात्रि की पावन बेला में कोलीपुरा स्थित प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर परिसर भक्ति, आस्था और रामायण के दिव्य प्रसंगों से सराबोर हो उठा। रामलीला के शुभारंभ के साथ ही मंदिर परिसर में धार्मिक उत्साह का वातावरण निर्मित हो गया। प्रयागराज से आए कलाकारों ने अपने प्रभावशाली अभिनय, सजीव संवादों और भावपूर्ण प्रस्तुतियों से पौराणिक प्रसंगों को मंच पर जीवंत कर दिया। भगवान शिव के विवाह से लेकर रावण के जन्म तक की लीलाओं ने श्रद्धालुओं को धर्म, मर्यादा और भारतीय संस्कृति के मूल्यों से जोड़ा। देर रात तक दर्शक मंचन का आनंद लेते रहे।

श्रद्धा और उत्साह के बीच हुआ रामलीला का शुभारंभ

प्राचीन श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर परिसर में आयोजित रामलीला का शुभारंभ संत माधव दास, संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा एवं महंत बृजेश शर्मा ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। धार्मिक आयोजन के प्रारंभ से ही परिसर में भक्ति का माहौल दिखाई दिया। भगवान के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने रामायण के प्रसंगों का आनंद लिया और कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना की।

शिव विवाह की लीला ने बांधा समां

रामलीला के पहले दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने इस पौराणिक प्रसंग को अपनी अभिनय कला और संवादों के माध्यम से इस तरह प्रस्तुत किया कि दर्शक कथा से जुड़ते चले गए। इसके बाद गणेश वंदना के साथ अन्य लीलाओं का क्रम आगे बढ़ा। धार्मिक परंपराओं और आस्था से जुड़े इन प्रसंगों ने नवरात्रि के उत्सव को विशेष आध्यात्मिक रंग प्रदान किया।

नारद मोह भंग से मिला अहंकार त्यागने का संदेश

नारद मोह भंग की लीला में नारद मुनि के मोह और उसके परिणामों को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। प्रसंग के अनुसार, भगवान विष्णु की लीला के कारण नारद मुनि को वानर रूप प्राप्त हुआ, जिससे वे क्रोधित हो गए और भगवान विष्णु को धरती पर जन्म लेने का श्राप दे दिया। कलाकारों ने इस प्रसंग के माध्यम से समझाया कि मोह और अहंकार व्यक्ति के विवेक को प्रभावित कर सकते हैं। कथा ने दर्शकों को आत्मचिंतन और विनम्रता का संदेश दिया।

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मनु-शतरूपा से रावण जन्म तक की लीलाओं का मंचन

कार्यक्रम में मनु-शतरूपा, सीता भूमि प्रवेश, रावण-वेदवती संवाद और रावण जन्म जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों की प्रस्तुतियां भी दी गईं। कलाकारों ने पौराणिक कथाओं की भावनाओं और घटनाक्रम को अभिनय के जरिए मंच पर उतारा। इन लीलाओं ने दर्शकों को रामायण से जुड़े विविध प्रसंगों से परिचित कराने के साथ कथा की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को भी सामने रखा। देर रात तक चले मंचन में श्रद्धालु पूरी तन्मयता से जुड़े रहे।

रामलीला केवल मनोरंजन नहीं, संस्कारों की पाठशाला : संत माधव दास

इस अवसर पर संत माधव दास ने कहा कि नवरात्रि के पावन अवसर पर क्षेत्रवासियों के सहयोग से मंदिर परिसर में रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को धर्म, मर्यादा, कर्तव्य और संस्कारों की शिक्षा देने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में रामलीला का महत्व और भी बढ़ जाता है। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्शों, पारिवारिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति से परिचित कराया जा सकता है। रामायण के प्रसंग मनुष्य को सत्य, त्याग, कर्तव्य और मर्यादा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

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धार्मिक आयोजन से भक्तिमय हुआ मंदिर परिसर

नृसिंह लक्ष्मी मंदिर परिसर में रामलीला के शुभारंभ ने क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का संचार किया। यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए केवल पौराणिक कथाओं को देखने का अवसर नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक परंपराओं और जीवन मूल्यों से जुड़ने का माध्यम भी बना। नवरात्रि के दौरान आयोजित रामलीला से भक्ति की यह धारा आने वाले दिनों में भी क्षेत्रवासियों को धर्म और संस्कारों के संदेश से जोड़ती रहेगी।

Sunil Sharma
By Sunil Sharma

सुनील शर्मा, सीहोर जिला ब्यूरो, पीपुल्स समाचार ढाई दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। दैनिक भास्कर, पत...

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