सीहोर में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन, पुतला फूंका; वोट चोरी और इलेक्टोरल बॉन्ड पर उठाए सवाल

सीहोर। हाथ में जलती मशालें और जुबां पर सत्ता और चुनाव आयोग के खिलाफ तीखे तेवर लिए कांग्रेसियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लोकतंत्र का आधुनिक रावण करार देते हुए उनका प्रतीकात्मक पुतला आग के हवाले कर दिया।
इलेक्टोरल बॉन्ड और वोट चोरी पर सीधा हमला
जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती की अगुवाई में जुटे सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता और इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए हुई कथित चंदा चोरी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारियों का साफ आरोप था कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोग सत्ता के दबाव में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार कर रहे हैं। राजीव गुजराती ने गरजते हुए कहा कि जिस तरह त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने अधर्मी और अहंकारी रावण का संहार कर सत्य की पुनर्स्थापना की थी, ठीक उसी तर्ज पर आज भारतीय लोकतंत्र को दीमक की तरह चाट रही शक्तियों का समूल नाश करने का वक्त आ गया है। उन्होंने सीधे शब्दों में चेतावनी दी कि निष्पक्ष मतदान जनता का बुनियादी हक है, जिस पर डाका बर्दाश्त नहीं होगा।
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'राम नाम पर चंदाखोरी और लोकतंत्र की हत्या बर्दाश्त नहीं'
धरने और पुतला दहन के दौरान राजीव गुजराती ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि एक तरफ धर्म और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के नाम की आड़ लेकर अनैतिक रूप से चंदा बटोरा जा रहा है, तो दूसरी तरफ चुनावी मशीनरी में हेरफेर कर जनादेश को चुराने का गंदा खेल चल रहा है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाएं जब निष्पक्षता का चोला उतारकर एकतरफा काम करने लगें, तो सड़कों पर उतरकर जनक्रांति करना विपक्ष का धर्म बन जाता है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जब तक चुनावी प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और इलेक्टोरल बॉन्ड घोटाले का पूरा सच जनता की अदालत में नहीं आ जाता, उनका यह जमीनी संघर्ष थमेगा नहीं।
भारी संख्या में जुटे कांग्रेसी
पुतला दहन के दौरान सीहोर बस स्टैंड पर सुरक्षा व्यवस्था के बीच माहौल पूरी तरह गरमाया रहा। कार्यकर्ताओं ने आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पुतले को धू-धू कर जला दिया। इस हाई-वोल्टेज विरोध प्रदर्शन में संगठन की एकजुटता भी नजर आई। प्रदर्शन के दौरान घनश्याम यादव, विष्णु प्रसाद राठौर, राजाराम बड़े भाई, राजेंद्र वर्मा, प्रीतम दयाल चौरसिया, नरेंद्र खंगराले, रमेश गुप्ता, सुनील दुबे, डॉ. अनीस खान, जयंत शाह, मनोज परमार, घनश्याम मीणा, सीताराम भारती, ओम्बाबा राठौर, के.के. रिछारिया, पंकज शर्मा, तुलसी राजकुमार राठौर सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ता डटे रहे। कांग्रेस ने अंत में साफ कर दिया कि लोकतंत्र की हिफाजत के लिए यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं है।




















