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यू ट्यूब पर सर्च किया कि गले की कौन सी नस काटने से होती है मौत, फिर कटर लेकर दादा को मारने निकल पड़ी

वेब सीरीज देख बच्चे हो रहे हिंसक
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यू ट्यूब पर सर्च किया कि गले की कौन सी नस काटने से होती है मौत, फिर कटर लेकर दादा को मारने निकल पड़ी

पल्लवी वाघेला-भोपाल। मां, जो चीज हद से ज्यादा तकलीफ देने लगे उसे रास्ते से हटा देना चाहिए। दादाजी के बिहेवियर के कारण सब परेशान रहते हैं। इस बार सारा टेंशन दूर हो जाएगा। अपनी 15 वर्षीय बेटी के मुंह से यह सुनकर अरेरा कॉलोनी निवासी मां हैरान रह गई। संभ्रांत परिवार की बेटी का यह बिहेवियर दरअसल, उन वेब सीरीज की देन था, जो वह बीते कई महीनों से देख रही थी। ओटीटी प्लेटफॉर्म और सिनेमाघरों में मनोरंजन के नाम पर हिंसक और सेक्सुअल कंटेंट परोसा जा रहा है।

इनमें जरा-जरा सी बात पर जान लेने वाले नायक बनकर उभर रहे हैं। बच्चों में नशा, और एडल्ट कंटेंट भी जमकर दिखाए जा रहे हैं। इसका असर बच्चों पर नजर आने लगा है। पहले जहां पबजी जैसे गेम्स बच्चों को हिंसक बना रहे थे, वहीं अब वेबसीरीज के कंटेंट उनमें आपराधिक मनोवृत्ति को जन्म दे रहे हैं। एक साइकोलॉजिस्ट के मुताबिक, उनके पास हर माह औसतन तीन केस आ रहे हैं, और यह तेजी से बढ़ रहे हैं।

डर के मारे नहीं गई ऑफिस

इस मामले में सरकारी कर्मचारी मां और एक्स आर्मी मैन दादा के बीच कहासुनी आम बात थी। ऐसे ही एक दिन पिता टूर पर गए थे और पसंद का खाना न बनने को लेकर दादा नाराज हो गए थे। मां ने किशोरी को चुपचाप दादा के कमरे की ओर बढ़ते देखा, तो टोका। उसके हाथ में कटर था। मां इतना डर गई कि अगले दिन ऑफिस ही नहीं जा पाई। इस मामले में किशोरी की जब काउंसलिंग की गई, तो उसने कई वेब सीरीज के उदाहरण दिए, जिसमें अपनों का मर्डर किया गया था। सामने आया कि झगड़े के बीच किशोरी ने यू- ट्यूब पर सर्च किया कि गले की कौनसी नस काटनी चाहिए। उसने कहा कि वह मां को मानसिक तनाव से बचाने ऐसा कर रही थी।

नशे की भी प्रवृत्ति बढ़ रही

एक अन्य मामले में 16 वर्षीय किशोर ने विवाद में दोस्त के सिर पर कांच की बोतल दे मारी। काउंसलिंग में सामने आया कि वह ग्रुप में खुद को सबसे ताकतवर साबित करना चाहता था। इसी तरह 17 वर्षीय किशोरी, पिता की मौत को भुलाने नशा करने लगी, क्योंकि एक वेबसीरीज में नायिका की बेटी को ऐसा करते देखा था।

कोई भी कंटेंट मन-मस्तिष्क को प्रभावित करता है। लगातार हिंसक चीजें देखने से कुछ समय बाद देखने वाला इसे नॉर्मल और जरूरी मान सकता है। बच्चों में सोशल एंग्जायटी का अनुभव, रील कंटेंट को रियल में अपनाने की सोच, सेक्सुअल बिहेवियर और दूसरों के प्रति अमानवीय दृष्टिकोण का खतरा रहता है। -दिव्या दुबे मिश्रा, साइकोलॉजिस्ट

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