
कोलकाता। कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अफसरों पर हमले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। मंगलवार को सुनवाई के बाद आदेश जारी करते हुए अदालत ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता शाहजहां शेख की हिरासत भी सीबीआई को सौंपने के निर्देश दिए। बंगाल पुलिस ने 29 फरवरी को शाहजहां शेख को हिरासत में लिया था। चीफ जस्टिस टी एस शिवज्ञानम की अध्यक्षता वाली बेंच ने निर्देश दिया कि मंगलवार शाम 4.30 बजे तक इस निर्देश का पालन कर दिया जाए। उधर, ममता बनर्जी की सरकार ने संदेशखाली मामले में सीबीआई जांच के निर्देश देने वाले कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
ईडी और सरकार ने दायर की थी याचिकाएं
इस केस में ईडी और राज्य सरकार दोनों ने सिंगल बेंच के सामने अलग-अलग अपीलें दायर कीं। इससे पहले कोर्ट के आदेश पर ही बंगाल सरकार ने उग्र भीड़ द्वारा ईडी अफसरों पर हमले की जांच के लिए सीबीआई और राज्य पुलिस की एक संयुक्त विशेष जांच टीम (एसआईटी) के गठन का आदेश दिया गया था। ईडी की डिमांड थी कि जांच सीबीआई को ट्रांसफर कर दी जाए, जबकि बंगाल सरकार ने अदालत से अनुरोध किया था कि इस मामले की जांच केवल राज्य पुलिस को दी जाए।
यह है मामला
विगत दिनों ईडी की टीम छापा मारने और जांच के लिए संदेशखाली पहुंची थी। यहां टीएमसी के नेता शाहजहां शेख और उनके समर्थकों पर ईडी के अधिकारियों और स्टाफ के अलावा साथ गए सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने का आरोप लगा था। इस घटना के बाद, भाजपा ने CBI जांच की मांग की थी जबकि पश्चिम बंगाल सरकार ने CBI जांच का विरोध किया था। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद CBI जांच का आदेश दिया।
ये कहा हाईकोर्ट ने अपने फैसले में
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस केस की जांच CBI को सौंपना “न्याय के हित में” होगा। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि राज्य की पुलिस ने इस मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच नहीं की। अदालत ने CBI को 6 माह के भीतर जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट पहुंची बंगाल सरकार
इधर, पश्चिम बंगाल सरकार हाईकोर्ट के फैसले को राजनीति से प्रेरित बताते हुए इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग करेगी। सरकार का दावा है कि इस तरह की CBI जांच राज्य के अधिकारों का उल्लंघन है। उधर, प्रदेश की विपक्षी पार्टी भाजपा ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे सच्चाई की जीत करार दिया। हालांकि अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है और बंगाल सरकार की याचिका पर सुनवाई के लिए 10 मार्च की तारीख तय की गई है।
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