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तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके को फ्यूचर गेमिंग से सबसे ज्यादा चंदा

􀂄 चुनाव आयोग ने जारी किया नया डेटा 􀂄 भाजपा ने भुनाए सबसे अधिक चुनावी बांड
तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके को फ्यूचर गेमिंग से सबसे ज्यादा चंदा

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने रविवार को कंपनियों और लोगों द्वारा खरीदे और राजनीतिक दलों की तरफ से भुनाए गए चुनावी बॉन्ड को लेकर नया डेटा सार्वजनिक किया। इससे यह खुलासा हुआ कि किस पार्टी को कितनी रकम चुनावी बॉन्ड्स के रूप में मिली हैं। ये वो डेटा है, जो शनिवार को चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से मिला। सुप्रीम कोर्ट ने ये डेटा डिजिटल फॉर्मेट में अपने पास रख लिया है।

नए डेटा के अनुसार, चुनावी बॉन्ड के सबसे बड़े खरीदार फ्यूचर गेमिंग और होटल सर्विसेज ने तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके को 509 करोड़ का चंदा दिया है, जबकि उसे कुल 656.5 करोड़ चंदा मिला। भाजपा को अन्य दलों के मुकाबले सबसे ज्यादा 6,986 करोड़ का चंदा मिला। उसके बाद पश्चिम बंगाल की टीएमसी को 1397 करोड़ रुपए मिले।

अधिकांश दलों डीएमके, एआइएडीएमके, आप, एसपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस और एनसीपी ने भुनाए बॉन्ड्स के मूल्य का ब्योरा तारीख वार दिया है। वहीं, भाजपा, टीएमसी, कांग्रेस ने यह तो बताया है कि उन्हें कब- कितनी राशि के बॉन्ड्स मिले, लेकिन किस कंपनी ने दिया? यह नहीं बताया है।

8 ऐसे मौके, जब भाजपा ने एक दिन में 100 करोड़ से ज्यादा का चंदा लिया

चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जारी नए डेटा से खुलासा हुआ है कि अप्रैल 2018 से 2023 के बीच आठ बार ऐसे अवसर आए हैं, जब बीजेपी को एक-एक दिन में एक-एक अरब रुपए या इससे भी ज्यादा चंदा चुनावी बॉन्ड्स के जरिए मिला है। एक दिन तो आंकड़ा दो सौ करोड़ रुपए तक का है। पार्टी ने 2019-20 में सबसे ज्यादा 2555 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड कैश कराए।

डीएमके, एआईडीएमके, आप और समाजवादी पार्टी ने बताए डोनर्स के नाम

चुनाव आयोग के नए डेटा में डीएमके, एआईडीएमके, आप और समाजवादी पार्टी ने चंदा देने वाले प्रमुख समूहों के नाम बताए हैं। एआईडीएमके ने बताया कि उसे 2-4 अप्रैल के बीच आईपीएल टीम चेन्नई सुपरकिंग्स से 5 करोड़ का चंदा चुनावी बांड के जरिए मिला। वहीं जद (यू) ने कहा कि 2019 में किसी ने उनके कार्यालय में 10 करोड़ के चुनावी बांड का लिफाफा सौंपा था, जिसे बाद में भुना लिया गया।

योजना शुरू होने के बाद से भुनाए बांड की जानकारी

रविवार को जारी डेटा सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चुनाव आयोग द्वारा सार्वजनिक किए गए कुल 523 मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से संबंधित आंकड़ों के विवरण का हिस्सा है। शुरुआत में एसबीआई द्वारा पेश डेटा 12 अप्रैल, 2019 से पिछले महीने शीर्ष अदालत द्वारा बांड को खत्म करने तक की अवधि से संबंधित था, वहीं नया डेटा पिछले साल नवंबर में विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा 2018 की शुरुआत में योजना शुरू होने के बाद से उनके द्वारा भुनाए गए बांड पर दी गई घोषणाओं पर आधारित है।

बीजेपी ने चुनावी बॉन्ड का सिस्टम निकाला। कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट मिलता है, फिर वो सीधे बॉन्ड खरीद लेते हैं। कंपनी को प्रॉफिट ही नहीं है और उससे ज्यादा पैसा वो बीजेपी को दे रही है। -राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद

चुनावी बांड न हो तो इलेक्शन में कालाधन आएगा। चर्चा होनी चाहिए कि चुनावी बांड से बेहतर क्या है? यदि आप बांड को स्वीकृति नहीं देंगे तो लोग नंबर दो में पैसे लेंगे। -नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री, सड़क परिवहन

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