
पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण पर मध्यप्रदेश सरकार की पुनर्विचार याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन कोर्ट ने सुनवाई को टाल दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के OBC आरक्षण मामले में सुनवाई के दौरान कहा कि मध्यप्रदेश का मामला भी अब 19 जनवरी को सुना जाएगाl बता दें कि शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र सरकार के मामले का हवाला देते हुए मध्य प्रदेश सरकार की मूल याचिका को खारिज कर दिया था। जिसके बाद राज्य सरकार ने पुनर्विचार याचिका दायर की है।
कितने पद रिक्त हैं ?
सुप्रीम कोर्ट में मध्यप्रदेश सरकार OBC के रिक्त पद की रिपोर्ट पेश कर सकती है। सामान्य प्रशासन विभाग की जानकारी के अनुसार, प्रदेश में 21 हजार से ज्यादा OBC के पद रिक्त हैं। वहीं इसके साथ ही राज्य शासन द्वारा OBC मतदाताओं की जानकारी भी तैयार की जा रही है।
सियासी घमासान जारी…
मध्यप्रदेश में पंचायत चुनाव रद होने के बाद OBC आरक्षण को लेकर सियासी घमासान जारी है। बता दें कि कांग्रेस OBC आरक्षण को लेकर भाजपा पर हमला कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण खत्म होने के लिए भाजपा जिम्मेदार है। वहीं पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने कहा कि भाजपा ने चुनाव प्रक्रिया से चुनाव ना कराकर मिले हुए अधिकार को छीनने का काम किया है, जो सही नहीं है। उन्होंने भाजपा को OBC विरोधी बताते हुए लोगों की भावनाओं को दबाने का काम करने का आरोप लगाया है।
MP और महाराष्ट्र सरकार की उलझनें
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को इम्पीरिकल डेटा इकट्ठा करने को कहा था। बता दें कि इस बारे में अब तक एकत्र की गई पूरी जानकारियां सरकार कोर्ट के सामने पेश कर सकती है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को स्थानीय निकायों के चुनावों में OBC आरक्षण रद्द किए जाने से खाली सीटों पर चुनाव करवाने का आदेश दिया था।
लेकिन इन सीटों पर ओपन कैटेगरी से चुनाव करवाने का निर्देश दिया गया था। ऐसे राज्य की पार्टियों को OBC वोटरों की नाराजगी का डर था। इसके बाद अलग-अलग पार्टियों ने ये फैसला किया कि जब तक रद्द किया हुआ राजनीतिक आरक्षण फिर से लागू नहीं हो जाता, तब तक चुनाव में वे अपने सभी कैंडिडेट OBC वर्ग से ही उतारेंगे।