
भोपाल। प्रदेश के रिटायर हो चुके IAS अधिकारी जगदीश चंद्र जटिया के एक खुले खत ने प्रदेश की राजनीति में चल रहे दलित मुद्दे को एक बार फिर हवा दे दी है। जटिया ने यह पत्र सीएम शिवराज सिंह चौहान को लिखा है, जिसमें उन्होंने अपने एक विचाराधीन प्रकरण पर जल्द निर्णय करने की मांग की है। उन्होंने खत में सवाल उठाया है कि जानबूझकर एक निर्दोष दलित के साथ क्य़ा यह आचरण उचित है? गौरतलब है कि मामला लंबित होने के कारण दलित आईएएस अघिकारी जटिया को रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले कुछ अनुषंगी लाभ अब तक नहीं मिले हैं।
CM और मेरे जवाब का आधार समान, फिर भी विलंब
जगदीश चंद्र जटिया को नौकरी मे रहते हुए अगस्त 2020 में एक कारण बताओ नोटिस जारी हुआ था। इस नोटिस में उन पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने सीएए-एनआरसी की आलोचना की है। इस नोटिस का जबाव जटिया मे सितंबर 2020 में ही दे दिया। इसके बाद वे अक्टूबर 2022 में रिटाय़र हो गए, लेकिन अब तक सरकार यह निर्णय नहीं ले पाई कि इस संबंध में जटिय़ा दोषी हैं या नहीं। उन्होंने नोटिस के जवाब में खुद को उसी आधार पर बेगुनाह बताया था, जो पटना हाईकोर्ट में सीएम शिवराज के खिलाफ दायर एक केस में बचाव के दौरान पेश किए गए थे। इस बारे में रिटाय़र आईएएस जगदीश चंद्र जटिया सवाल उठाते हुए कहते हैं कि- “जब मेरे और सीएम के जवाब का एक ही आधार है तो ऐसे में इस केस को लंबित रखने में विलंब क्यो किया जा रहा है?”
मजबूरी में लिखा खुला खत
जगदीश चंद्र जटिया के अनुसार उन्होंने इस लंबित मामले पर फैसला लेने के लिए कई बार सरकार और सीधे सीएम को पत्र लिखकर आग्रह किया, लेकिन उन्हें कभी किसी खत का जवाब नहीं मिला। इसी कारण उन्होंने इस बार खुला खत लिखा है। वे आरोप लगाते हैं कि उन्हे जो नोटिस दिया गया था, वह भी साजिश का हिस्सा था।
खुला खत पढ़ने के लिए क्लिक करें नीचे दिए गए ट्वीट को..
https://twitter.com/OfficeofSSC/status/1680585008409346048
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