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नमामि गंगे प्रोजेक्ट में शामिल ‘मुरार’ का जीर्णोद्धार, स्थिति नाले जैसी

ग्वालियर। नेशनल मिशन ऑफ गंगा प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने के बाद रमौआ डैम से 39.24 करोड़ की राशि से जीर्णोद्धार का काम शुरू होने के बाद भी मुरार (वैशाली) नदी अभी तक साफ नहीं हो सकी है। साथ ही 12.3 किमी में बहने वाली नदी में से लगभग 10 किमी हिस्से में सालों पुरानी स्थिति के चलते जगह-जगह गाद जमा होकर गंदा पानी बहने से अभी भी नाले जैसी स्थिति है।

ग्वालियर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के रमौआ डैम से शुरू होने के बाद लगभग डेढ़ से दो किमी हिस्से में साफ पानी के साथ बहती है। लेकिन, इसके बाद रिहायशी इलाका शुरू होने पर मुरार बारादरी, कालपी ब्रिज से जड़े रमौआ बांध तक पहुंचने के बीच 25 खुले नाले नदी में मिलते हैं। इनसे ही नदी का पानी सीवर जैसा हो जाता है। पिछले 10 साल में यहां करीब 2.60 करोड़ तक खर्च हो चुका है और मुरार नदी में अमृत योजना के तहत सीवरेज लाइन भी डाल दी गई है। लेकिन, इसके बाद भी नदी के अंदर सीवर की गंदगी पहले की तरह ही बह रही है। जिम्मेदारों को नदी सुधार अभियान में सीवरेज बहाकर लाने वाले नालों को सीवरेज की लाइन में मिलाना था, लेकिन यह कार्य आज तक नहीं हो सका है।

जमीन पर कब्जा हटाने नहीं किया सीमांकन

बहाव क्षेत्र में काफी अतिक्रमण है। ऐसे में उसका सीमांकन होने पर कोई निर्णय नहीं हुआ। हालांकि, निर्माण करने वाली कंपनी कई बार तय जमीन को खाली कराने के लिए कह चुकी है। अनदेखी से नाराज बीज विकास निगम के अध्यक्ष मुन्नालाल गोयल मुख्यमंत्री को पत्र तक लिख चुके हैं।

इस तरह हो रहा है जीर्णोद्धार

  • मुरार नदी के जीर्णोद्धार के लिए नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत 39.24 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं।
  • नदी सुधार के लिए तीन महीने का समय टेंडर प्रक्रिया और प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए 27 महीने का समय रखा गया है।
  • 18 महीने में प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन किया जाना है। 6 महीने का समय ऑपरेशन एंड मैंटेनेंस के लिए रखा गया है।
  • रमौआ बांध से बायपास ब्रिज का विकास (750 मी.), गांधी रोड ब्रिज से संतर रिवर ब्रिज का विकास (770 मी.)।
  • संतर रिवर ब्रिज से कालपी ब्रिज का विकास (1100 मीटर), कालपी ब्रिज से जड़ेरूआ बांध की डाउन स्ट्रीम का विकास (100 मी)।
  • मुरार नदी के बाकी हिस्सों का विकास (9480 मीटर)।

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