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महंगाई का विरोध भी महंगा; 5 साल में दोगुना बढ़ गया खर्च

प्रदर्शन करना, पुतले जलाना, कार्यकर्ताओं को जुटाना और छोटी सी सभा करना भी खर्चीला हो गया

नरेन्द्र सिंह-जबलपुर। अब यदि राजनीतिक या सामाजिक संगठन महंगाई के विरोध में प्रदर्शन,धरना या पुतला दहन करते हैं तो उन पर भी महंगाई की मार पड़ रही है। कारण, धरना प्रदर्शन में उपयोग होने वाली सामग्री की कीमतों में उछाल आ गया है। जो दल आर्थिक रूप से समर्थ हैं उनका तो ठीक है । मगर शहरों की क्षेत्रीय संस्थाओं के लिए ये सब करना आसान नहीं रह गया है है। पीपुल्स टीम ने पड़ताल की तो दिलचस्प जानकारी सामने आई।

सामाजिक संस्थाओं के लिए महंगाई

पुतला दहन या मशाल जुलूस जैसे विरोध प्रदर्शन चाहे सत्ता में बैठी भाजपा हो या विपक्ष की भूमिका में कांग्रेस दोनों ही एक दूसरे के खिलाफ करते रहते हैं। इन दोनों दलों को न तो कार्यकर्ताओं की कमी होती हैऔर न ही धन की। समस्या आती है सामाजिक संगठनों को जो गर्मियों में मटके लेकर नगर निगम मे प्रदर्शन करते हैं। इनके लिए विरोध प्रदर्शन की सारी व्यवस्थाएं करना काफी महंगा होता है।

जानिए कितनी बढ़ गईं कीमतें

  • पुतला : पुतला बनाना 400 रु. तक। इसमें बांस 60 रु,पैरा 150, पुराने कपड़े 100 रु., सुतली आदि खर्च शामिल हैं। पहले 250 में बन जाता था।
  • मशाल : 100 रुपए की एक मशाल पड़ती है। इसमें पाइप का टुकड़ा, पुराने कपड़े जीआई तार से बांधकर, जले ऑयल में आधा घंटा डुबाकर रखते हैं। यह पहले 50 से 60 रुपए की पड़ती थी।
  • तख्तियां : तख्तियों का खर्च औसतन 20 रुपए प्रति है । यदि 50 भी रखीं तो इनका खर्च 1 हजार रुपए। पहले प्रति तख्ती 10 से 12 रुपए की मिलती थी।
  • सभा खर्च : सभा करनी है तो लाइट, टेंट, कुर्सी, माइक से लेकर चाय-पानी का खर्चा 5 हजार रुपए आता है। पहले यह 2 से 3 हजार रुपए में निपट जाती थी।

पहले एक सभा 3 हजार में हो जाती थी, अब लगते हैं 6 हजार

धरना-प्रदर्शन के दौरान होने वाली सभा का खर्च पिछले 5 सालों में करीब 50 फीसदी तक बढ़ा है। हमारे पास जो आर्डर आते हैं वे अब की स्थिति में करीब 5 से 6 हजार रुपए के होते हैं । 5 साल पहले 3 हजार रुपए तक इसका बिल होता था। -गणेश पटेल,संचालक गणेश टेंट हाउस गेट नंबर 4

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