
अशोक गौतम-भोपाल। प्रदेश के शहरों में खाली और जर्जर भवनों को तोड़कर सरकार वहां बहुमंजिला भवन बनाएगी। इनमें तीन तरह के भवन आवासीय, व्यावसायिक और सरकारी कार्यालय शामिल हैं। सरकार ने यह काम मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड को दिया है। हाउसिंग बोर्ड ने इस तरह के प्रोजेक्ट भोपाल सहित करीब 25 जिलों में लॉन्च करने का प्लान किया है। इसमें भोपाल के प्रोफेसर कॉलोनी, ग्वालियर के थाटीपुर सहित 22 जिलों में सरकार की साधिकार समिति ने मंजूरी दी है और इसकी डीपीआर भी तैयार कर ली गई है। निर्माण पीपीपी मोड पर किया जाएगा। इसमें चार हजार करोड़ से अधिक के निवेश की संभावना है।
रियल एस्टेट कंपनियां करेंगी तैयार
इसमें रियल एस्टेट कंपनियां निर्माण करेंगी। इस पर खर्च के बदले में उन्हें भूखंड उपलब्ध कराया जाएगा। जबलपुर संभागीय कार्यालय बनाने का काम समदड़िया बिल्डर, सिवनी कलेक्ट्रेट ऑफिस बनाने का काम रायसिंह एंड कंपनी को मिला है। सीधी कलेक्ट्रेट ऑफिस डीसीवी प्राइवेट लि. भोपाल को मिला है। इस तरह करीब 32 कंपनियों ने काम शुरू कर दिया है।
11 जिलों में बनेंगे कलेक्ट्रट, SDM दफ्तर
भोपाल सहित प्रदेश के 11 जिलों में कलेक्ट्रेट, एसपी और एसडीएम कार्यालय बनाए जाएंगे। इन जिलों में कलेक्ट्रेट भवन या तो जर्जर हैं यह फिर किराए के भवनों में चल रहे हैं। इनमें रिडेंसिफिकेश न के तहत दूसरी जगह पर या वहीं पास में कुछ सरकारी भवनों को तोड़कर वहां कलेक्ट्रेट भवन बनाए जाएंगे। इसमें भोपाल कलेक्ट्रेट, एसडीएम कार्यालय पांच सौ करोड़ रु. का होगा। जबलपुर में 119 करोड़ रु. का संभागीय कार्यालय और कटनी, शिवपुरी, पन्ना, मऊगंज, मैहर, बुरहानपुर, सीधी, सिवनी, झाबुआ और सिवनी जिले में एसडीएम और एक्साइज सहित अन्य ऑफिस बनाए जाएंगे। ये प्रोजेक्ट 100 करोड़ रुपए से कम के होंगे।
सागर सहित सात जिलों में जेल कॉम्प्लेक्स
सागर सहित सात जिलों में जेल कॉम्प्लेक्स बनाए जाएंगे। सागर में 325 करोड़ रुपए के कॉम्प्लेक्स बनाने का डीपीआर तैयार किया गया है। रतलाम में सौ करोड़ रुपए का तथा दमोह, मंदसौर, झाबुआ, छतरपुर और बैतूल में सौ करोड़ रुपए से नीचे के जेल कॉम्प्लेक्स के निर्माण किए जाएंगे। सभी कॉम्प्लेक्स के डीपीआर तैयार हो गए हैं।
कई डीपीआर तैयार हुईं
कई शहरों में रि-डेंसिफिकेशन के तहत शासकीय और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं। कई प्रोजेक्टों की डीपीआर तैयार कर ली गई है, कई के टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं। – चंद्रमौली शुक्ला, आयुक्त, मप्र गृह निर्माण एवं अधोसंरचना बोर्ड