
बिजनेस डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लगातार 11वीं बार ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया है। 4 दिसंबर से चल रही मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक में रेपो रेट को मौजूदा दर 6.5% पर बरकरार रखने का फैसला किया गया। यानी लोन महंगे नहीं होंगे और आपकी EMI भी नहीं बढ़ेगी। RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने मीटिंग में लिए गए फैसले की जानकारी दी। RBI ने आखिरी बार फरवरी 2023 में दरें 0.25% बढ़ाकर 6.5% की थीं।
MPC के 6 में से 4 सदस्य बदलाव के पक्ष में नहीं
MPC में 6 सदस्य हैं, जिनमें से तीन केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास, डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजीव रंजन हैं। सरकार ने 1 अक्टूबर को समिति में तीन नए बाहरी सदस्यों को नियुक्त किया, जिनमें राम सिंह, सौगत भट्टाचार्य और नागेश कुमार शामिल हैं।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि, मौद्रिक नीति समिति के 6 में से 4 सदस्य ब्याज दरों में बदलाव के पक्ष में नहीं थे। बिना किसी बदलाव के, स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी यानी SDF रेट 6.25% पर बनी हुई है और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी यानी MSF रेट और बैंक रेट 6.75% पर बरकरार है।
FY25 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान
पहले | अब | |
Q3FY25 | 7.4% | 6.8% |
Q4FY25 | 7.4% | 7.2% |
Q1FY26 | 7.3% | 6.9% |
Q2FY26 | – | 7.3% |
फरवरी 2023 से रेपो रेट स्थिर
देश में महंगाई के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद इसे तय दायरे में वापस लाने के लिए रिजर्व बैंक ने मई 2022 के बाद से लगातार नौ बार Repo Rate में इजाफा किया था। वहीं फरवरी 2023 के बाद से इनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। अप्रैल और जून में हुई बैठक में भी इस दर को स्थिर रखा गया था।
पिछले वित्त वर्ष 6 बार में इतना बढ़ा रेपो रेट
मॉनेटरी पॉलिसी की मीटिंग हर दो महीने में होती है।
- अप्रैल 2022 में हुई मीटिंग में RBI ने रेपो रेट को 4% पर स्थिर रखा था। लेकिन RBI ने 2 और 3 मई को इमरजेंसी मीटिंग बुलाकर रेपो रेट को 0.40% बढ़ाकर 4.40% कर दिया था।
- 6 से 8 जून 2022 को हुई मीटिंग में रेपो रेट को 0.50% बढ़ाकर 4.90% कर दिया गया।
- अगस्त 2022 में इसे 0.50% बढ़ाया गया जिससे ये 5.40% पर पहुंच गई।
- सितंबर 2022 में रेपो रेट को 0.50%बढ़ाकर 5.90% कर दिया गया।
- दिसंबर 2022 में हुई मीटिंग के बाद ब्याज दरें 6.25% पर पहुंच गई।
- वित्त वर्ष 2022-23 की आखिरी मीटिंग फरवरी में हुई, जिसमें ब्याज दरें 6.25% से बढ़ाकर 6.50% कर दी गई थीं।
क्या होता है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट ?
जानकारी के मुताबिक, रेपो रट वे दर है जिस पर RBI द्वारा बैंकों को कर्ज दिया जाता है। बैंक इसी कर्ज से ग्राहकों को लोन देते हैं। बता दें कि रेपो रेट कम होने का मतलब है कि बैंक से मिलने वाले कई तरह के लोन सस्ते हो जाएंगे। जबकि रिवर्स रेपो रेट इसके उलट होता है। रिवर्स रेपो रेट वे दर है, जिस पर बैंकों की ओर से जमा पर RBI से ब्याज मिलता है। रिवर्स रेपो रेट के जरिए बाजार में लिक्विडिटी कंट्रोल किया जाता है।
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