
भारत भवन में चार दिवसीय आदरांजलि: बव कारंत स्मृति समारोह का शुभारंभ रविवार को रंगमंडल, रिपर्टरी की रंग यात्रा पर आधारित रंग आयाम प्रदर्शनी की शुरुआत के साथ हुआ। इसके साथ ही बेंगलुरु के बेनका नाट्य मंडली ने टीएस नागभरणा के निर्देशन में नाटक बव कारंत की प्रस्तुति दी, जिसका लेखन भी टीएस नागभरणा ने किया।
इस नाटक में आर्टिस्ट्स ने कन्नड़ और हिंदी भाषा में अपने डायलॉग बोले, जिन्हें दर्शकों ने भाषाओं से कम और आर्टिस्ट्स के भाव से ज्यादा समझा। 32 सीन के इस नाटक में भरपूर गाने रहे। इसमें तीन अलग- अलग आर्टिस्ट्स ने मंच पर बव कारंत का किरदार निभाया, जिसमें बचपन का किरदार अभिनंदन, युवावस्था का प्रभंजन नायडू और बव कारंत का वरिष्ठ किरदार मंजुनाथ के. ने मंच पर उतारा।
बव कारंत की मृत्यु के सीन में मंच पर एक साथ आए 32 आर्टिस्ट
नाटक के लेखक और निर्देशक टीएस नागभरणा ने बताया कि इस नाटक को उन्होंने बव कारंत की जीवनी और उनकी पत्नी प्रेमा कारंत की आत्मकथा के आधार पर तैयार किया। नाटक में बताया कि बव कारंत का जन्म 1929 में अमावस्या की रात में कर्नाटक के बाबूकोड़ी गांव में नारायणप्पा और लक्ष्मम्मा के घर हुआ। बचपन से ही उनका झुकाव संगीत की ओर था। कुछ समय बाद वे मैसूर गए, जहां गुब्बी थिएटर ग्रुप ज्वाइन किया। हिंदी भाषा और संगीत सीखने के लिए उन्होंने बनारस का रुख किया। प्रेमा कारंत से शादी के बाद दिल्ली में एनएसडी में एडमिशन लिया और पढ़ाई पूरी होने के बाद एनएसडी के निदेशक बने। उन्होंने भोपाल आकर रंगमंडल की स्थापना की। नाटक के अंतिम सीन में 32 कलाकार एक साथ मंच पर नजर आए। इस सीन में बव कारंत की मृत्यु होती है तो सभी उन्हें आदरांजलि देते दिखते हैं।
एग्जीबिशन में लगाई नाटकों की कॉस्ट्यूम
कार्यक्रम के दौरान शुरू हुई रंग आयाम एग्जीबिशन में सालों पुराने नाटकों की कॉस्ट्यूम और उसमें उपयोग हुई प्रॉपर्टी को लगाया गया। इसमें इंग्लैंड के निर्देशक द्वारा आयोजित ग्रीक नाटक के कॉस्ट्यूम और प्रॉपर्टी भी है। इतना ही नहीं कई तरह के मुखौटे, तलवार, ढोलक, बांसुरी, भूत वाले कपड़े इत्यादि को देखा जा सकता है।