Jodhpur Borewell Accident: 1050 फीट गहरे बोरवेल में गिरा 9 साल का भोमाराम, 40 घंटे तक चला NDRF-SDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन; नहीं बची जान

राजस्थान के फलोदी जिले के लोहावट क्षेत्र में बोरवेल हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। पूनिया की ढाणी में 9 साल का भोमाराम 1050 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया था। मासूम को बचाने के लिए NDRF, SDRF और स्थानीय बचाव दल ने करीब 40 घंटे तक लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। शुक्रवार रात करीब 3 बजे बच्चे को बोरवेल से बाहर निकाल लिया गया, लेकिन अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिवार में मातम है और पूरे इलाके में शोक का माहौल है।
1050 फीट गहरे बोरवेल में फंसा था मासूम
भोमाराम को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन और बचाव दल ने पूरी ताकत लगा दी थी। हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। बच्चे को बाहर निकालने के लिए SDRF के जवानों ने प्रयास शुरू किए। बाद में NDRF की टीम भी घटनास्थल पर पहुंची और विशेष उपकरणों की मदद से बचाव अभियान आगे बढ़ाया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कई चुनौतियां सामने आईं। बोरवेल के अंदर पत्थर होने और पानी आने के कारण बचाव कार्य में बाधा आ रही थी। टीमों को बार-बार अपनी रणनीति बदलनी पड़ी। करीब 40 घंटे तक चले अभियान के बाद बच्चे को बाहर निकालने में सफलता मिली, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
NDRF और SDRF ने संभाला मोर्चा
बच्चे को बचाने के लिए कई टीमों ने मिलकर काम किया। अभियान के दौरान प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे और स्थिति पर नजर बनाए रखी। बच्चे को बाहर निकाल लिया गया, लेकिन अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया।
बोरवेल में पत्थर और पानी बना बड़ी चुनौती
रेस्क्यू के दौरान बोरवेल के भीतर पत्थर होने की वजह से कैमरा और पाइप नीचे पहुंचाने में परेशानी आने की जानकारी सामने आई। बचाव दल को बच्चे की स्थिति का पता लगाने और उसे बाहर निकालने के लिए अलग-अलग तरीकों से प्रयास करना पड़ा। जब सामान्य तरीके से बचाव अभियान में मुश्किलें आईं, तब स्थानीय विशेषज्ञों की मदद से विशेष उपकरण तैयार करने की कोशिश की गई। लोहे के सरियों को जोड़कर उपकरण बनाने और उन्हें बोरवेल में उतारने जैसे प्रयास भी किए गए।
बताया गया कि बोरवेल में करीब 30 फीट की गहराई पर पत्थर होने के कारण अभियान में बाधा आ रही थी। वहीं, बच्चे की हलचल देखने के लिए कैमरे की मदद लेने की कोशिश भी की गई। ऐसी परिस्थितियों में बचाव दल के लिए बच्चे तक पहुंचना और उसे सुरक्षित बाहर निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया।
खेत में नलकूप की मरम्मत के दौरान कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के मुताबिक, भोमाराम पूनिया की ढाणी का रहने वाला था। गुरुवार दोपहर वह अपने पिता पांचाराम भील के खेत में मौजूद था। खेत में नलकूप खराब होने के कारण उसे ठीक करने के लिए मशीन बुलाई गई थी। इसी दौरान बच्चा अचानक बोरवेल में गिर गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीण तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और प्रशासन को सूचना दी। कुछ ही समय में पुलिस और बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर बच्चे को निकालने की कोशिश शुरू कर दी।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, गांव में मातम
भोमाराम को बचाने के लिए परिवार और ग्रामीण लगातार दुआ कर रहे थे। बचाव अभियान के दौरान हर नई जानकारी के साथ लोगों की उम्मीदें बनी हुई थीं। लेकिन बच्चे की मौत की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे अभियान की निगरानी की। NDRF, SDRF और स्थानीय बचाव विशेषज्ञों ने बच्चे को निकालने के लिए लगातार प्रयास किए। इसके बावजूद हादसे का दुखद परिणाम सामने आया।
गुजरात की केमिकल फैक्ट्री में विस्फोट! 5 मजदूरों की मौत, कई घायल
खुले बोरवेल से बचाव के लिए क्या सावधानी जरूरी है?
बोरवेल हादसों को रोकने के लिए समय रहते सुरक्षा उपाय करना बेहद जरूरी है। खासकर खेतों और निर्माण स्थलों पर बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
- इस्तेमाल में नहीं आने वाले बोरवेल को मजबूत ढक्कन से पूरी तरह बंद रखें।
- बोरवेल के आसपास खुला गड्ढा या असुरक्षित जगह न छोड़ें।
- मरम्मत या खुदाई के दौरान बच्चों को मशीनों और गड्ढों से दूर रखें।
- खुले बोरवेल की जानकारी तुरंत स्थानीय प्रशासन को दें।
- हादसा होने पर खुद जोखिम उठाने के बजाय तुरंत पुलिस और आपातकालीन बचाव दल को सूचना दें।
भोमाराम की मौत ने फिर उठाए सुरक्षा पर सवाल
राजस्थान के फलोदी जिले के लोहावट क्षेत्र में 9 साल के भोमाराम की बोरवेल में गिरने से हुई मौत बेहद दुखद है। करीब 40 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में NDRF, SDRF और स्थानीय टीमों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन अंततः उसे नहीं बचाया जा सका। खुले बोरवेल को सुरक्षित ढंग से बंद करना और बच्चों को ऐसे खतरनाक स्थानों से दूर रखना कितना जरूरी है। समय रहते सुरक्षा उपाय किए जाएं, तो इस तरह की कई दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।



















