
इंदौर प्रशासन ने शहर को 100% भिक्षुक मुक्त बनाने के उद्देश्य से भिक्षावृत्ति पर सख्ती बरतते हुए एक जनवरी से भिक्षा लेने और देने, दोनों पर वैधानिक कार्रवाई का आदेश जारी किया है। इस फैसले के तहत न केवल भीख मांगने वालों बल्कि भीख देने वालों पर भी एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। इस निर्णय के तहत भिक्षावृत्ति करने वालों को पुनर्वास केंद्रों में भेजा जा रहा है।
कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचे भिक्षुक
प्रशासन की इस कार्रवाई के खिलाफ शहर के भिक्षुक लामबंद हो गए हैं। मंगलवार को कलेक्टर जनसुनवाई में बड़ी संख्या में भिक्षुक पहुंचे और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। उनका कहना है कि वे मजबूरी में भीख मांगने को विवश हैं, क्योंकि उनके पास रोजगार का कोई विकल्प नहीं है। कुष्ठ रोगियों ने भी अपनी समस्याएं रखते हुए कहा कि उन्हें इलाज और जीवन यापन के लिए दी जाने वाली सरकारी पेंशन अपर्याप्त है। ऐसे में उन्होंने सरकार से पेंशन बढ़ाने की मांग की है।
भिक्षुकों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करता, तो वे भोपाल जाकर मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे। इस दौरान जनसुनवाई में आए अधिकारियों ने उनकी बातें सुनीं और ज्ञापन स्वीकार किया।
कलेक्टर बोले- प्रशासन की पहल जारी रहेगी
इधर, इंदौर के कलेक्टर आशीष सिंह ने इस मुद्दे पर स्पष्ट किया कि भिक्षावृत्ति रोकने की दिशा में प्रशासन की पहल जारी रहेगी। उनका कहना है कि पुनर्वास केंद्रों में अब तक भेजे गए भिक्षुकों को रोजगार मुहैया कराने के साथ-साथ उन्हें बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं। हालांकि, कुष्ठ रोगियों की पेंशन बढ़ाने का निर्णय राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में है।
कलेक्टर कार्यालय पहुंचे भिक्षुक
बता दें इस पहल का उद्देश्य इंदौर को एक स्वच्छ और विकसित शहर बनाना है। दरअसल, सहयोग कुष्ठ निवारण संघ के बैनर तले भिक्षावृत्ति को लेकर बड़ी संख्या में भिक्षुक रैली की शक्ल में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। वे अपने हाथों पर पोस्टर लिए हुए थे जिसमें लिखा था- भिक्षावृत्ति पेशा नहीं मजबूरी है। कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सहयोग कुष्ठ निवारण संघ ने आर्थिक मदद की मांग की है।
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