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EVM के बाद अब पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनावों में पेपरलेस बूथ की तैयारी, MP निवार्चन आयुक्त ने कहा- डिजिटल तकनीकों से प्रक्रिया सुगम होगी

EVM के बाद अब पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनावों में पेपरलेस बूथ की तैयारी, MP निवार्चन आयुक्त ने कहा- डिजिटल तकनीकों से प्रक्रिया सुगम होगी
सिवनी/भोपाल। मध्य प्रदेश में पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के बाद अब पेपरलेस बूथ प्रणाली की कल्पना को साकार किया जा रहा है। पंचायत उप-निर्वाचन में इस प्रणाली का सफलतापूर्वक उपयोग किया गया है। यह जानकारी राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने राज्य निर्वाचन आयोग की 31वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस में साझा की, जो कि सिवनी जिले के पेंच राष्ट्रीय उद्यान में आयोजित की गई। कॉन्फ्रेंस 3 और 4 मार्च को भी जारी रहेगी।

पंचायत व निकाय चुनाव लोकतंत्र की प्रयोगशाला

राज्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनाव लोकतंत्र की प्रयोगशाला और परीक्षण स्थली के रूप में कार्य करते हैं। उन्होंने बताया कि जब भी निर्वाचन संबंधी कोई महत्वपूर्ण प्रयोग होते हैं, तो सबसे पहले इन्हें स्थानीय चुनावों में आजमाया जाता है। इसी तरह, जब महिलाओं को प्रतिनिधि संस्थाओं में आरक्षण देने का विचार आया, तो इसे सबसे पहले पंचायतों और स्थानीय निकायों में लागू किया गया। मध्यप्रदेश में महिलाओं को पहले 33 प्रतिशत और बाद में 50 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया।

पेपरलेस बूथ प्रणाली से चुनाव प्रक्रिया में बदलाव

राज्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि डिजिटल तकनीकों को अपनाने से निर्वाचन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुगम होगी। पेपरलेस बूथ प्रणाली के माध्यम से सभी दस्तावेज डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगे, जिससे मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होगी। इस प्रणाली के प्रमुख लाभ...
  • चुनावी खर्च में कमी : डिजिटल प्रक्रिया अपनाने से चुनाव में लगने वाले अमले की संख्या कम होगी, जिससे खर्च में भी कमी आएगी।
  • पारदर्शिता और विश्वसनीयता : मतदान प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता आएगी और धोखाधड़ी की संभावनाएं कम होंगी।
  • तकनीकी उन्नति : नई तकनीकों को अपनाने से निर्वाचन प्रक्रिया का आधुनिकीकरण होगा।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अनुभवों का समावेश

उन्होंने यह भी बताया कि ऑनलाइन वोटिंग का सफल प्रयोग पहली बार एस्टोनिया में किया गया था। इसी तरह, अन्य देशों में भी डिजिटल तकनीकों का प्रयोग कर चुनावों को अधिक कुशल बनाया जा रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि चुनावी खर्च को कम करने के लिए राज्यों के बीच ईवीएम शेयरिंग की प्रक्रिया को अपनाया जाना चाहिए। इस कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता असम के राज्य निर्वाचन आयुक्त आलोक कुमार ने की। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न राज्य निर्वाचन आयोगों के नवाचारों को समाहित कर प्रकाशित पुस्तक 'एक्स-चेंज एक्स-पीरियंस इनिशिएटिव-2025' का विमोचन किया गया।

लोकल बॉडी इलेक्शन प्रक्रिया पर दी विशेष प्रस्तुति

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव अभिषेक सिंह ने इंटीग्रेटेड पोलिंग बूथ मैनेजमेंट सिस्टम पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि इस प्रणाली से चुनावी प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाया जा सकता है। इसके अलावा, आंध्रप्रदेश निर्वाचन आयोग की आयुक्त नीलम साहनी ने स्वचालित लोकल बॉडी इलेक्शन प्रक्रिया पर एक विशेष प्रस्तुति दी। इसमें इलेक्टोरल रोल मैनेजमेंट और पोल मैनेजमेंट के ऑटोमेशन पर चर्चा की गई।

अन्य राज्यों से सीखने की पहल

इस सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के निर्वाचन अधिकारियों ने अपने-अपने राज्यों में अपनाए गए नवाचारों और सुधारों को साझा किया। लखनादौन एसडीएम रवि सिहाग और सहायक कलेक्टर पंकज वर्मा ने 'ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिसेस' पर प्रस्तुति दी और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के सुझाव दिए। इस अवसर पर त्रिपुरा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा स्थानीय निर्वाचन प्रक्रिया पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी प्रदर्शित की गई। कार्यक्रम के प्रथम सत्र के समापन पर कलेक्टर सिवनी संस्कृति जैन ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
Mithilesh Yadav
By Mithilesh Yadav

वर्तमान में पीपुल्स समाचार के डिजिटल विंग यानी 'पीपुल्स अपडेट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर कार्यरत हूं।...Read More

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