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पुलिस निरीक्षक ने 400 गरीब बच्चों को दिलाया स्कूलों में प्रवेश, कॉपी-किताब का खर्च भी उठाते हैं

ड्यूटी के बाद बच्चों की सेवा कर समय का कर रहे सदुपयोग
पुलिस निरीक्षक ने 400 गरीब बच्चों को दिलाया स्कूलों में प्रवेश, कॉपी-किताब का खर्च भी उठाते हैं

धर्मेंद्र त्रिवेदी-ग्वालियर। डीआईजी ग्वालियर रेंज कार्यालय में पदस्थ निरीक्षक सर्विस के साथ झुग्गी बस्ती, डेरों में रह रहे गरीब बच्चों को स्कूल पहुंचाने का काम कर रहे हैं। 2018 में लिए संकल्प के बाद निरीक्षक अक्षुण्ण बोहरे अब तक 400 से अधिक फुटपाथी व झुग्गी बस्ती में निवासरत बच्चों को स्कूल पहुंचा चुके हैं। अक्षुण्ण हर महीने बच्चों के बीच कॉपी-किताबें लेकर पहुंचते हैं। दरअसल, निरीक्षक अक्षुण्ण बोहरे के पिताजी पं. विश्वेश्वर दयाल बोहरे ज्योतिषाचार्य रहे हैं।

ग्रामीण पृष्ठभूमि और धार्मिक माहौल के बीच उन्होंने ड्यूटी के साथ-साथ समाजसेवा का कार्य करना भी शुरू कर दिया था। उप निरीक्षक ने स्टेनो के पद पर चयन के बाद पिताजी की सीख को अपनाकर अपने वेतन का दसवां हिस्सा गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए निकालना शुरू किया। इसके बाद से मदद का यह सिलसिला लगातार जारी है।

मदद के लिए ग्रुप बनाया

बोहरे ने अपने वेतन के साथ ही मदद के लिए ग्रुप तैयार कर सदस्यों को भी राशि देने के लिए प्रेरित किया। इस राशि से स्कूल यूनिफॉर्म, कॉपी-किताबों के साथ कोई बच्चा पढ़ने में कमजोर है, तो उसकी ट्यूशन फीस की व्यवस्था भी करते हैं।

अवकाश का यह है उपयोग

महीने में अवकाश के कम से दो दिन मंदिर, रेलवे स्टेशन, झुग्गी-बस्ती एवं आसपास के ग्रामीण इलाकों में बच्चों की लिस्ट बनाकर शिक्षा की जानकारी लेते हैं। लिस्ट से नाम शॉर्ट लिस्ट करके चरणबद्ध तरीके से बच्चों को स्कूल पहुंचाने के लिए सारे दस्तावेज तैयार कराकर नजदीकी स्कूल में एडमिशन की प्रक्रिया पूरी कराते हैं।

प्रेरणा पिताजी से मिली है। पढ़ाई के समय सारे बच्चों को रेलवे स्टेशन, चौराहों पर या फिर मंदिरों के बाहर भिक्षावृति करते देखकर बुरा लगता था। तब सोचा कि आर्थिक रूप से सक्षम होने पर निर्धन बच्चों की मदद जरूर करूंगा। वरिष्ठों से भी प्रोत्साहन मिल रहा है। -अक्षुण्ण बोहरे, निरीक्षक, ग्वालियर

People's Reporter
By People's Reporter

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