
कुवैत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर कुवैत पहुंचे। 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बाद ये किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला कुवैत दौरा है । जब पीएम मोदी कुवैत पहुंचे तो उनका एयरपोर्ट पर रेड कार्पेट वेलकम हुआ। भारतीय मूल के लोगों ने मोदी के स्वागत में कथकली डांस परफॉर्म किया।
पीएम मोदी का कुवैत दौरा कितना अहम
पीएम मोदी का कुवैत दैरा भारत और कुवैत के बीच संबंधों को बेहतर करेगा। कुवैत में भारतीय समुदाय के करीब 10 लाख लोग रहते हैं। ये वहां रहने वाले विदेशी लोगों में सबसे ज्यादा हैं। पीएम मोदी के कुवैत दौरे को लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा की भारत और कुवैत के बीच पारंपरिक रूप से गहरे संबंध हैं, जिनकी जड़ें इतिहास में हैं। यह लोगों के बीच मजबूत संबंधों पर आधारित हैं। भारत कुवैत के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में से एक है। इससे भारत-कुवैत के बीच बहुआयामी संबंधों को और मजबूती मिलेगी।
कुवैत इस समय खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) का अध्यक्ष हैं। इसमें संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सऊदी अरब, ओमान और कतर शामिल हैं। इनमें कुवैत ही अकेला GCC सदस्य है, जहां नरेंद्र मोदी 2014 में पीएम बनने के बाद से अब तक नहीं गए हैं। खाड़ी देश भारत के लिए ऊर्जा, निवेश और व्यापार के आधार पर प्रमुख साझेदार हैं।
सालों पहले से भारत और कुवैत की दोस्ती
भारत-कुवैत के बीच राजनयिक संबंध 1961 में स्थापित हुए। ऐतिहासिक रूप से दोनों देशों के बीच रिश्ते दोस्ताना हैं। जब कुवैत में तेल का कारोबार नहीं था, उस समय कुवैत की अर्थव्यवस्था के लिए भारत के साथ समुद्री व्यापार काफी अहम था। उस समय कुवैत से नई जहाज, कीमती मोती, मछली, खजूर, अरबी घोड़े और लकड़ियां भारत भेजी जाती थीं। साथ ही दोनों देशों में मसाले, अनाज और कपड़े का व्यापार होता था। कुवैत में साल 1961 तक भारत का रुपया चलता था। जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों का पता चलता है।
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